उत्तम आसन बनाये रखने वाला शरीर उत्तम पोषण की सर्वप्रथम विशेषता है । अन्य विशेषताओं में शारीरिक ढाँचे का उत्तम विकास, जिसमें सीधी अस्थियाँ तथा भुजाएँ एवं सीमित जोड़, चौड़ी तथा सपाट छाती, जिसका समुचित मात्रा में विस्तार किया जा सके, सुविकसित श्रोणी, सुविकसित तथा सुसंगठित जबड़े एवं मजबूत चिकने व स्वस्थ दाँत, पर्याप्त वसायुक्त सुविकसित मांसपेशियाँ, चिकने तथा चमकीले केश आदि सम्मिलित हैं। आँखें कान्तिमय, उनके नीचे काले वृत्त नहीं होते ।
अस्पष्ट विशेषताओं में पाचन, रक्त संचरण, श्वासोच्छवास्, निष्कासन एवं ग्रन्थितन्त्र आदि का समुचित रूप से कार्य करना तथा संक्रामत रोगों के प्रति अवरोध शक्ति होना सम्मिलित है । उपर्युक्त विशेषताओं के अतिरक्त अच्छी भूख लगना, भोजन में स्वाद आना, किसी भी कार्य को सन्तोषजनक ढंग से करने की योग्यता रखना तथा भवात्मक स्थिरता होना - ये सभी बातें उत्तम पोषण की दशाओं को प्रकट करती हैं । उत्तम पोषण तथा दोषपूर्ण पोषण के लक्षणों की तुलनात्मक सारणी इस अध्याय के आगामी पृष्ठों में प्रस्तुत की गई है ।