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तिरिया तो में तीन गुन, औगुन हैं लख चार। / मंगल गावे सत रचे, कोखन उपजें लाल।। / तिरिया रोवे पुरुष बिना। खेती रोवे मेह बिना।।

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तिरिया तो में तीन गुन, औगुन हैं लख चार। / मंगल गावे सत रचे, कोखन उपजें लाल।। / तिरिया रोवे पुरुष बिना। खेती रोवे मेह बिना।।

info अर्थ:

पुरुष के बिना जैसे स्त्री का जीवन व्यर्थ है वैसे ही वर्षा के बिना खेती व्यर्थ होती है।