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राम बिना दुख कौन हरे। बरखा बिन सागर कौन भरे।। / लच्छमी1 बिन आदर कौन करे। माता बिन भोजन कौन धरे।।

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राम बिना दुख कौन हरे। बरखा बिन सागर कौन भरे।। / लच्छमी1 बिन आदर कौन करे। माता बिन भोजन कौन धरे।।

info अर्थ:

(1-गृहलक्ष्मी, पत्नी।) राम ही सबके दु:खों का निवारण करते हैं। वर्षा ही जल की आपूर्ति करती है पत्‍नी ही पति का आदर और माँ के द्वारा पकाया हुआ भोजन श्रेष्‍ठ होता है।