अक्षर: र
अक्षर 'र' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंरइये जाके राज में ताकी तैसी कइये। / ऊँट बिलाई ले गई (तौ) हाँजू हाँजू कइये।
राज्य की नीति के अनुसार चलना चाहिए।
रइये लटपट काट दिन, बरु घामें मा सोय। / छाँयँ न बाकी बैठिये जो तरु पतरो होय।।
कमजोर वृक्ष की छाया में बैठने से धूप में बैठना अच्छा है।
रई बात थोड़ी, जीन लगाम घोड़ी।
कोई व्यक्ति नाममात्र की वस्तु के मिलने से फूल उठे तब उसके प्रति व्यंग्य में।
रंग पै आई कोंसिया, कये खसम से मौसिया।
लाड़ में आकर धृष्टता-पूर्ण बर्ताव करना।
रँड़ुआ की बिटिया और राँड़ कौ लरका। (जे दोऊ बिगर जात)
इसलिए कि लड़की की देखभाल माँ ही कर सकती है और लड़के की पिता।
रँधे भात कौ का राँधिये और गाये गीत कौ का गाइये।
कही बात को बार-बार क्या कहना।
रँधो भात।
रँधा भात शीघ्र बिगड़ जाता है और एक दिन के बाद ही खाने के योग्य नहीं रहता। अतः कहावत का प्रयोग ऐसी वस्तु के लिए होता है जो बहुत दिनों तक घर में न रखी जा सके, अथवा हजम न की जा सके, जैसे विवाह के योग्य सयानी लड़की अथवा पराई थाती।
रन जायँ, न राउर जूझें।
न लड़ाई पर जायँ, न राजा से जूझें। कुछ हो, हमें कोई मतलब नहीं।
रबा पै जवा धरबो।
छोटी वस्तु पर बड़ी वस्तु जमाना। किसी को और अधिक उत्तेजित करना।
रबा1 धरबो।
(1-सोने-चाँदी के आभूषणों पर छोटा गोल कण जमाने को रवा रखना कहते हैं।) उत्तेजित करना। उकसाना।
रये तौ आप सें, नई तौ जाय सगे बाप से।
अर्थात स्त्री सच्चरित्र रह सकती है तो अपने आप ही, अन्यथा अपने बाप के साथ भी बिगड़ जाती है।
रस सें मरै तौ बिस काय कों देवे।
आसानी से काम हो जाय तो झंझट क्यों मोल ली जाय।