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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: र

अक्षर 'र' से शुरू होने वाली कहावतें

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रइये भुक्ख तौ रइये सुक्ख।

पेट को थोड़ा खाली रखने से आदमी सुख में रहता है।

रई बात थोड़ी, जीन लगाम घोड़ी।

कोई व्यक्ति नाममात्र की वस्तु के मिलने से फूल उठे तब उसके प्रति व्यंग्य में।

रखपत सो रखापत।

दूसरों की इज्जत रखो तो दूसरे तुम्हारी इज्जत रखेंगे।

रंग पै आई कोंसिया, कये खसम से मौसिया।

लाड़ में आकर धृष्टता-पूर्ण बर्ताव करना।

रंग में भंग।

शुभकार्य में विघ्न।

रँड़ुआ की बिटिया और राँड़ कौ लरका। (जे दोऊ बिगर जात)

इसलिए कि लड़की की देखभाल माँ ही कर सकती है और लड़‌के की पिता।

रतनन के आँगे दिया नईं बरत।

रत्नों के आगे दीपक नहीं जलता।

रँधो भात कीके पेट समात ?

रँधा भात किसे हजम हो सकता है?

रँधो भात।

रँधा भात शीघ्र बिगड़ जाता है और एक दिन के बाद ही खाने के योग्य नहीं रहता। अतः कहावत का प्रयोग ऐसी वस्तु के लिए होता है जो बहुत दिनों तक घर में न रखी जा सके, अथवा हजम न की जा सके, जैसे विवाह के योग्य सयानी लड़की अथवा पराई थाती।

रन जायँ, न राउर जूझें।

न लड़ाई पर जायँ, न राजा से जूझें। कुछ हो, हमें कोई मतलब नहीं।

रन जीत लओ।

रण जीत लिया। बड़ा काम कर लिया। व्यंग्य में।

रबा पै जवा धरबो।

छोटी वस्तु पर बड़ी वस्तु जमाना। किसी को और अधिक उत्तेजित करना।

रबा1 धरबो।

(1-सोने-चाँदी के आभूषणों पर छोटा गोल कण जमाने को रवा रखना कहते हैं।) उत्तेजित करना। उकसाना।

रमतुला1 दैबो।

(1-तुरही की तरह का एक बाजा।) ढिंढोरा पीटना। घोषणा करना।

रये तौ आप सें, नई तौ जाय सगे बाप से।

अर्थात स्त्री सच्चरित्र रह सकती है तो अपने आप ही, अन्यथा अपने बाप के साथ भी बिगड़ जाती है।

रस सें मरै तौ बिस काय कों देवे।

आसानी से काम हो जाय तो झंझट क्यों मोल ली जाय।