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सावन में ससरारी गये, पूस में खाये पुआ। / चैत में छैला पूछत डोलें, तुम्हरे केतिक हुआ।।

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सावन में ससरारी गये, पूस में खाये पुआ। / चैत में छैला पूछत डोलें, तुम्हरे केतिक हुआ।।

info अर्थ:

छैल-चिकनिया किसान पर व्यंग्य। सावन में ससुराल गये। पूस में मौज से पुए खाये। इस तरह अपनी खेती तो चौपट कर दी। अब चैत में दूसरों से पूछते फिरते हैं कि तुम्हारे कितना हुआ ?