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चाकर से कूकर भलो, सोवे अपनी नींद। / चातुर खों चिन्ता घनी, नहिं मूरख खों लाज। / सर-औसर जानें नहीं, पेट भरे सों काज।।

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चाकर से कूकर भलो, सोवे अपनी नींद। / चातुर खों चिन्ता घनी, नहिं मूरख खों लाज। / सर-औसर जानें नहीं, पेट भरे सों काज।।

info अर्थ:

स्पष्ट।