अक्षर: च
अक्षर 'च' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंचटू कें ब्याव, भँड़ू न्योतें आई।
चटोर स्त्री के यहाँ ब्याह में चोट्टी न्योते आयी। जैसे के यहाँ तैसे ही आते हैं। अथवा जैसे को तैसे मिलते हैं।
चढ़ जा बच्चा सूली पै, भली करेंगे राम।
किसी को बढ़ावा देकर झगड़े में फँसा देना और स्वयं अलग रहना।
चढ़ाये की नाइन।
चढ़ावे के समय की नाइन। विवाह के दिन जब वरपक्ष की ओर से लड़की के लिए चढ़ावा चढ़ने आता है तब नाइन विशेष रूप से सजी-बजी तो नजर आती ही है, पर उसके साथ ही वह बहुत व्यस्त भी रहती है। विवाह संबंधी कार्यों के लिए उसे बार-बार इधर से उधर जाना पड़ता है। अतः कहावत बनी-ठनी स्त्री, अथवा ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त जो किसी का संदेश-वाहक बनकर आये।
चढ़ो ददा जू, चढ़ो कका जू, कोसक घुरिया रीती गई।
ददाजू आप चढ़ें, ककाजू आप चढ़ें, इसी में एक कोस तक घोड़ी खाली हो गयी।
चतुर कों चौगुनी, मूरख कों सौगुनी।
दूसरे की संपत्ति चतुर को चौगुनी और मूरख को सौगुनी प्रतीत होती है।
चतुर चार जाँगाँ चूकत।
चतुर चार जगह चूकते हैं। बहुत चतुराई करने वाला भी कभी-कभी घोखा खा जाता है।
चनन के धोकें कऊँ मिर्चें न चबा जइयो।
चनों के धोकें कहीं मिर्चें मत खा जाना। अर्थात काम उतना आसान नहीं जितना समझ रखा है। समझ-बूझ कर हाथ डालना।
चना और चुगल मों लगे अच्छे नई होत।
चना खाने में अच्छे लगते हैं, उसी प्रकार चुगली की बात भी सुनने में अच्छी। लगती है। परन्तु बाद में दोनों कष्टकर होते हैं।
चना चिरौंजी हो रये।
चना चिरौंजी की तरह मँहगे हो रहे हैं। अथवा इतने दुष्प्राप्य हैं कि चिरौंजी की तरह मीठे लगते हैं। खाद्य-वस्तुओं के बहुत मँहगे होने पर कहते हैं।
चमचोल1 के बाप बकलफोर।
(1-ऐसी वस्तु जो मुलायम होते हुए भी कठिनाई से टूटे।) कंजूस।