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बुंदेलखंड विश्वकोश

चाव घटे नित के घर जायँ, भाव घटे कछ मुख से माँगें, / रोग घटे कछु औषध खायें, ज्ञान घटे कुसंगत पायें। / चाहत की चाकरी कीजे। अनचाहत

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चाव घटे नित के घर जायँ, भाव घटे कछ मुख से माँगें, / रोग घटे कछु औषध खायें, ज्ञान घटे कुसंगत पायें। / चाहत की चाकरी कीजे। अनचाहत

info अर्थ:

जो प्रेम से रखे उसी की नौकरी करनी चाहिए।