अक्षर: ए
अक्षर 'ए' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंएक नाक दो छींक। काम बने भौत ठीक।।
छींक के संबंध में लोक-विश्वास। यदि एक नाक से एक के बाद एक, दो छींकें हों तो कार्य सफल होता है।
एक पंथ दो काज।
किसी एक काम के लिए जाने पर दूसरा काम बनना अथवा दुहरा लाभ होना।
एक पाख दो गहना, राजा मरै कै सहना1।
(1.शहना। अ० शिहनः शासक, कोतवाल, कर-संग्रह करने वाला।) ग्रहण के संबंध में लोक-विश्वास। यदि एक पत्रवारे में दो ग्रहण पड़ें तो राजा मरे या शासक।
एक पूत जिन जनमो माय। घर सूनो जो बाहर जाय।।
एक पुत्र का होना अच्छा नहीं। उसके बाहर जाने पर घर सूना रहता है।
एक पे एक ग्यारा।
एक के स्थान पर दो आदमी मिल जायें तो बड़ा काम कर सकते हैं। संघ में बड़ी शक्ति होती है।
एक बिछौना सोओ और आँग से आँग लगे नई।
कोई काम करो भी और उसके परिणाम से भी बचना चाहो, ये दोनों संभव नहीं।
एक बेर जोगी, दो बेर भोगी, तीन बेर रोगी।
योगी दिन में एक बार, और भोगी दो बार शोच जाता है, इससे अधिक बार जाय तो उसे रोगी समझना चाहिए।
एक मिले काना तौ लौट घरे आना।
रास्ते में काना मनुष्य मिल जाय तो फिर लौट कर घर आ जाना चाहिए। काने के संबंध में अंघ-विश्वास।
एक म्यान में दो तरवारें नई रतीं।
किसी एक ही वस्तु पर दो का अधिकार नहीं हो सकता।
एक रती1 बिन नहीं रती कौ।
(1.रति, धन, प्रतिष्ठा।) मान-सम्मान के बिना मनुष्य कौड़ी काम का नहीं।
एक लिखता सौ बकता।
एक लिखने वाला, सौ बकने वाले के बराबर है। कलम में बड़ी ताकत होती है।
एक साँड़ के हगें बिटा नई जुरत।
एक साँड के गोबर से कंडों का ढेर इकट्ठा नहीं होता।
एक सो आदो, दो सो चार।
एक तो आधे के बराबर है, और यदि एक से दो हो जायें तो उनमें चार की शक्ति आ जाती है।
एक हर हत्या, दो हर पाप। तीन हर खेती, चौ हर राज।।
एक हल की खेती तो मुसीबत है, दो हल की पाप है, तीन हल की खेती कने खेती कहा जा सकता है, और चार हल की खेती हो तो क्या पूछना, वह तो राज्य के तुल्य है। कृ.।
एक हात की तारी नई बजत।
झगड़ा कभी एक ओर से नहीं होता। दो मनुष्यों में यदि एक लड़ाकू न हो ती कभी लड़ाई नहीं हो सकती।
एकई साधें सब सधे सब साधें सब जाय।
(1) एक बार में एक काम ही करना चाहिए। (2) किसी काम के लिए एक आदमी का आश्रय ग्रहण करना ही ठीक होता है।