अक्षर: छ
अक्षर 'छ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंछिरिया1 के गोड़े बुकरिया में, बुकरिया के गोड़े छिरिया में।
(1-बकरी का बच्चा) इधर की चीज उधर मिलाना। ऊँट-पटांग काम करना।
छींकत नहाइये, छोंकत खैये, छींकत रहिये सोय। / छींकत पर घर न जाइये, चाय सर्व स्वर्न को होय।।
छींक संबधी विश्वास।
छींके की टूटन, बिलइया की लपकन।
छींके का टूटना और बिल्ली का लपकना। संयोग से कोई अच्छा काम बन जाना।
छींट को घँघरिया1 गजी को तना2।
(1-खादी। 2- घाँघरे के ऊपर की वह गोट जिसमें डोरा डालते हैं।) बेमेल काम।
छुरी, छड़ी, छतरी, छला, सदा राखिये पास। / छूँछी हँड़िया बजे टन टन।
घर में कुछ खाने को नहीं। अथवा गुणहीन बहुत बात करता है।
छूछो फटको उड़ उड़ जाय।
मूर्ख के पास से कोई सार की बात पल्ले नहीं पड़ती। अथवा मूर्ख बड़ा घमंडी होता है।
छूटी घोड़ी भुसौरे ठाँड़ी।
जिसे जो आदत पड़ जाती है वह मुश्किल से छूटती है। अथवा जिसे कोई और ठिकाना नहीं होता वह घूम-फिर कर अपने स्थान पर ही आता है।
छेरी अपने जी सें गई, राजा कयें अरौनी भई।
बकरी की तो जान गयी, और राजा कहते हैं- इसमें नमक कम है। कोई आदमी किसी के लिए मर मिटे और वह उसके प्रति थोड़ा भी कृतज्ञ न हो तब कहते हैं।
छै मईना कौ सकारौ करत।
छः महीने का सवेरा करते हैं। वादाखिलाफी करना। समय पर काम करके न देना।
छोटे-बड़े, सब कें दो कान।
क्या छोटे, क्या बड़े, सब बराबर होते हैं। सबके दो कान हैं।
छोटो मों ऐंठे कान। जई बरद की है पहचान।।
अच्छे बैल की पहिचान यही है कि उसका मुँह छोटा और कान ऐंठे हुए हों।
छोड़िये न जबान, खेंचिये न कमान। खेलिये न जुआ, फाँदिये न कुआ।।
पा. हूजिये न जमान...
छोड़ी राम अजुध्या, जो चाहे सो लेय।
किसी बात से कोई मतलब न रखना। रुपये-पैसे का मोह छोड़ कर झगडे से अलग होना।