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अक्षर: ट

अक्षर 'ट' से शुरू होने वाली कहावतें

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टाँड़े में हो लुखरो1 कड़ गईं नैकानजू कुँआँवन लगीं।

(1-लोखरी, लोमड़ी।) एक बार एक लोमड़ी बनजारों के एक दल के बैलों के नीचे होकर खुलक कर निकल गयी। अपने इस वीरतापूर्ण कार्य के लिए उसका नाम पड़ गया 'नैकानजू' अर्थात 'लाँघ कर निकल जानेवाली' साधारण सी करनी के लिए जब कोई अपनी प्रशंसा का ढोल पीटे तब कहते हैं।

टाँय-टाँय फिस्स।

आडंबर तो बहुत, परंतु अंत में काम कुछ नहीं।

टिकली सेंदुर से गये तौ का खावे मेंई बज्जुर परै !

बनाव-श्रृंगार की सामग्री से गये तो क्या पेट भर भोजन भी नहीं मिलेगा ?

टीप-टाप करबौ।

बिगड़े हुए काम को इधर-उधर से बनाने का प्रयत्न करना।

टूटी तान कसौरिया1 पै।

(1-देहाती बाजों के साज में मृदंग और इकतारे के साथ काँसे की एक कटोरी भी रहती है, जो एक छोटी लकड़ी से बजायी जाती है। यह कसावरी कहलाती है और उसे बजाने वाला कसौरिया।) बेसुरा तो हुआ कोई, परन्तु सारा गुस्सा उतरा कसौरिया पर। अर्थात काम तो किसी से बिगड़ा और उसका दोष मढ़ा गया किसी दूसरे के सिर।

टेड़ी खीर है।

जब कोई मामला बेढब तरीके से उलझ जाय और उसे सुलझाना बहुत कठिन हो तब कहते हैं।