अक्षर: भ
अक्षर 'भ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंभाई, भतीजो, भानजो, भुइयाँ उर भूपाल। / इन पाँचऊअन को छोड़कें अंत करौ व्यापार।। / भाई, भनजया सोई, जीमें हँड़िया खुदबुद होई।
भाई-भानजा वही है जिससे काम निकले।
भाँड़न के घोड़े, खायें भौत चलें थोड़े।
बड़े आदमियों के नौकरों के लिए कहते हैं।
भाँडन के संग खेती करी, गा बजा कें अपनी करी।
भाँड़ों के साथ खेती की जाय तो कोई उनसे क्या वसूल कर लेगा ? गा-बजा कर वे तो उसे अपना बना लेंगे।
भाँड़ी भई है तौ दो छाबें और सई।
बात बिगड़ी है तौ दो छबले और सही। अर्थात बदनामी ही जब हुई है तो व्यर्थ खर्च क्यों किया जाय ?
भिम्म के हाती।
भीम के हाथी। ऐसा आदमी जिसका कहीं ठिकाना न लगे। जनश्रुति है कि महाभारत के युद्ध में भीम ने शत्रुओं की सेना के हाथी पकड़-पकड़ कर आकाश में फेंक दिये थे जो अब भी वहाँ निरुद्देश्य घूम रहे हैं।
भींत भीतरी, कुआ बायरो।
घर की दीवाल भीतर की ओर दबी हुई और कुएँ का घेरा बाहर की ओर फैला हुआ होना चाहिए। इससे वे मजबूत रहते हैं।
भींत लैकें चितेउर करत।
दीवाल हाथ में लेकर चित्रकारी करते हैं। अनहोनी या असंभव काम करना।
भुगतमान भुगते बने, ज्ञानी मूरख दोय। / ज्ञानी भुगते ज्ञान सों, मूरख भुगते रोय।। / भुस के मोल मलीदा।
अंधेर की बात।
भुस में अँगरा डार, मलंगो दूर भई।
दो आदमियों में लड़ाई-झगड़ा करा कर अलग हो जानेवाले के लिए।
भूँक गयें भोजन मिले, जाड़ो गये रजाई। / जोबन गयें तिरिया मिली कौन काम की भाई।।/ भूँक में चना चिरोजी।
भूख में चना भी चिंरौजी जैसी स्वादिष्ट लगते हैं।
भूँकें बेर, अघाने पोंड़ा।
बेर भोजन के पूर्व और गन्ना भोजन के बाद सेवन करना चाहिए।
भूँके भगत न होय गुपाला। / भूँजी मछरी दौ में परी।
भूँनी हुई मछली पानी में गिर गयी। हाथ में आयी चीज निकल गयी।