बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: घ

अक्षर 'घ' से शुरू होने वाले शब्द

arrow_back वापस जाएं

घेंगो [ghengo]

सं.पु.
चावलों में भुने हुए चने का आटा मिलाकर बनाया गया नमकीन व्यंजन.

घेंट [ghenT]

सं.पु.
फोड़े में पीप की गाँठ, जब तक यह नहीं निकलती तब तक मवाद बनना बंद नहीं होता है.

घेंटी [ghenTI]

सं.स्त्री.
चने का फल, जिसमें एक या दो दाने होते हैं.

घेर कटन्नी [ghera kaTannI]

सं.स्त्री.
जूते के बाहरी भाग की सिलाई करने में प्रयुक्त औजार.

घेवर [ghevar]

सं.पु.
एक प्रकार की मिठाई.

घेवरा [ghevarA]

सं.स्त्री.
एक बेल, जिसकी पत्तियों में मूँग जैसे दाने होते हैं, यह दवा के काम में आते हैं.

घेवरिया [ghevariyA]

सं.पु.
घेवर बनाने का साँचा.

घेंसुआ [ghensuA]

सं.पु.
घोंसला, पक्षी द्वारा तिनका-तिनका जोड़कर बनाया गया घोंसला.

घैचो [ghaico]

सं.पु.
पाई के दूसरे सिरे पर लगी कैंचीनुमा लकड़ी .

घैरा घूसा [ghairA ghUsA]

सं.पु.
खुसुर-फुसुर के रूप में की गई निंदा या आलोचना.

घैला [ghailA]

सं.पु.
मझोले आकार की गागर.

घैलिया [ghailiyA]

सं.पु.
छोटे मुँह का घड़ा.

घोक [ghok]

सं.स्त्री.
बारजा, मकान की ऊपरी मंजिल.

घोंगा [ghongA]

वि.
क्रि. मूर्खतापूर्ण कार्य प्रदर्शित करना.

घोंच [ghonc]

सं.स्त्री.
देशी जूते का अग्रभाग जिसकी नोंक ऊपर उठी रहती है.

घोंचदार [ghoncadAr]

वि.
आगे की ओर लौटी हुई नोंक वाले जूते.

घोंचपा [ghoncapA]

वि.
बहुत सीमित ढंग सोचने वाला, मूर्ख.

घोजी [ghojI]

सं.स्त्री.
छोटे बच्चे को झुलाने का छोटा झूलना.

घोंट [ghonT]

सं.पु.
सेजे के फल जो चमड़ा पकाने के काम आता है.