बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: झ

अक्षर 'झ' से शुरू होने वाले शब्द

arrow_back वापस जाएं

झिकाऊ [jhikAU]

सं.पु.
मड़वा साधने या संतुलन बनाए रखने के लिए लगाई गई मोटी लकड़ी.

झिकी [jhikI]

सं.स्त्री.
काले कंकड़, जिन्हें पीसकर काली मिट्टी के बर्तनों पर पालिश की जाती है.

झिक्क [jhikk]

सं.स्त्री.
सनक.

झिंझरी [jhinjharI]

सं.स्त्री.
जालीनुमा शिल्प के अर्थ में.

झिंझिया [jhinjhiyA]

सं.स्त्री.
क्वार में लड़कियों द्वारा मनाया जाने वाला एक पर्व.

झिनझिनी [jhinajhinI]

सं.स्त्री.
अवरुद्ध या मंद रक्तचाप के कारण किसी अंग विशेष में शून्यता.

झिर [jhir]

सं.स्त्री.
बाँध या तालाब की दीवार से पानी का रिसना.

झिरझिरा [jhirajhirA]

सं.पु.
पत्तों में छेद करने वाला एक रोग.

झिरझिरौ [jhirajhirau]

वि.
विरल बुनाई वाला वस्त्र.

झिरबौ [jhirabau]

क्रि.अ.
रिसना, स्रावित होना, छोटे रंध्रों से किसी तरल का धीरे-धीरे बाहर निकलना.

झिरिया [jhiriyA]

सं.स्त्री.
छोटा और उथला कुआँ.

झिरी [jhirI]

सं.स्त्री.
दो वस्तुओं के बीच की पतली खाली जगह.

झिरी रून्दा [jhirI rUndA]

सं.पु.
पताम लगाने तथा बारीक कट लगाने में प्रयुक्त औजार.

झिरोंगौ [jhirongau]

सं.पु.
कई दिनों से हो रहा वर्षा का मौसम.

झिलकबौ [jhilakabau]

क्रि.अ.
त्वचा के नीचे से रक्त का झलकना किसी सतत पर तरल की अत्यंत कम मात्रा का होना.

झिलबौ [jhilabau]

क्रि.अ.
पानी का किसी स्थान पर इकट्ठा होना.

झिलमिली [jhilamilI]

सं.स्त्री.
एक घड़ा, जिसमें एक दिया भीतर, पाँच बाहर की ओर जलाए जाते हैं। नवरात्रा पूजन के बाद इसमें चावल भरकर लड़की को ससुराल भेजते हैं.