बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: ढ

अक्षर 'ढ' से शुरू होने वाले शब्द

arrow_back वापस जाएं

ढडोरबौ [DhaDorabau]

क्रि.स.
पतले गोबर से लीपना.

ढड्ढड़ाबौ [DhaDDhaRabau]

क्रि.अ.
सीढ़ियों से गिरकर लुढ़कना.

ढनढनाबौ [DhanaDhanAbau]

क्रि.अ.
बर्तनों के टकराने से उत्पन्न आवाज.

ढपला [DhapalA]

सं.पु.
चमड़ा मढ़ा हुआ छिचली गोल पेंदी का बाजा ताँसा.

ढबिया [DhabiyA]

सं.स्त्री.
छोटी छत.

ढबुआ [DhabuA]

सं.पु.
वर्षा से बचने के लिए बाँस की खपच्चियों, पलाश के पत्तों से ढककर छतरीनुमा घर.

ढमढमा [DhamaDhamA]

सं.पु.
खाली पीपे में लकड़ी के टुकड़े को रस्सी से बाँधकर बनाया गया यंत्र जिसे खेतों में पशु-पक्षी भगाने के लिए उपयोग किया जाता है.

ढरबौ [Dharabau]

क्रि.अ.
पौधों का फलना-फूलना बंद हो जाना.

ढवा [DhavA]

सं.पु.
काँस का बना हुआ वर्षा से बचने का वस्त्र.

ढाँई [DhAMI]

सं.स्त्री.
दहाई का अंक, दहाई की इकाई.

ढाउढप्प [DhAuDhapp]

वि.
आकार में विशेष बड़ा.

ढाँक [DhAMk]

सं.स्त्री.
गोट, देवता को प्रसन्न करने के लिए बजाई जाने वाली ढोलक, गोट में डोल बजाने की शैली.

ढांक [Dhank]

सं.स्त्री.
वाद्ययंत्र.

ढाँकबौ [DhAMkabau]

क्रि.स.
ढकना, छुपाना.

ढाँड़बौ [DhAMRabau]

क्रि.अ.
पशुओं की पतले दस्त होना.

ढाँड़ू [DhAMRU]

वि.
शरीर से मोटा-ताजा किंतु शक्ति में निर्बल.

ढार [DhAr]

सं.पु.
किसी चोट पर बार-बार तर करने का कार्य.