बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: प

अक्षर 'प' से शुरू होने वाले शब्द

arrow_back वापस जाएं

पसाई [pasAI]

सं.स्त्री.
धान की किस्म जो घास की तरह अपने आप पैदा होती है.

पसाबौ [pasAbau]

सं.स्त्री.
उबले हुए चावल या अनाज में से अतिरिक्त जल को छानना.

पसारबौ [pasArabau]

क्रि.स.
फैलाना.

पसी [pasI]

सं.स्त्री.
परिश्रम अथवा गर्मी के कारण शरीर से निकलने वाला जल प्रस्वेद, स्वेद.

पसीजबौ [pasIjabau]

क्रि.अ.
धन पदार्थ में से द्रव अंश का रिस-रिसकर बाहर निकलना, पसीने से जर होना.

पसुरिया [pasuriyA]

सं.स्त्री.
पसली, मनुष, पशु आदि की छाती के पजर में आड़ी और कुछ गोलाकार हड्डी.

पसूपेस [pasUpes]

सं.पु.
पसोपेश, संकल्प-विकल्प की मनोदशा.

पसेरी [paserI]

सं.स्त्री.
पाँच सेर की तोल का बाँट

पसोंनयाँ [pasonnayAM]

वि.
पसाकर बनाने वाले चावल.

पस्त [past]

वि.
परास्त, हार माना हुआ, थका हुआ.

पहरावन [paharAvan]

वि.
सामान्य व्यक्तियों का सम्मान.

पहरुआ [paharuA]

सं.पु.
पहरेदार, पहरा देने वाला, चौकीदार.

पहार [pahAr]

सं.पु.
पहाड़, पर्वत.

पहारन [pahAran]

सं.पु.
पर्वत पर.

पहुज सहजाद [pahuj sahajAd]

सं.स्त्री.
नदी.

पहेलबौ [pahelabau]

क्रि.स.
बलपूर्वक भेजना, किसी को समझा-बुझाकर भेजना.

पाउने [pAune]

सं.पु.
मेहमान.

पाऔ [pAau]

सं.पु.
मेज, कुर्सी, पलंग, तख्त आदि निर्जीव वस्तु पैर.