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प्रो. अच्युतानन्द दाश

शास्त्र और टेक्नोलॉजी का अनूठा संगम थे। प्रो. अच्युतानन्द दाश का जन्म 20/05/1960 को पुरी (ओडिशा) में हुआ। बचपन में ही पिताजी का निधन होने के कारण इनकी माँ ने ही यथोचित पालन पोषण कर उच्च शिक्षा दिलवायी। प्रो.दाश ने पुरी से हायर सेकण्डरी, केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरुपति से स्नातक, रा.सं.सं., नई दिल्ली से अद्वैत वेदान्त में शास्त्री, पुणे विश्वविद्यालय से संस्कृत तथा पाली में स्नातकोत्तर, एम.फिल. तथा पीएच. डी. तक शिक्षा अर्जित की। सागर वि. वि के संस्कृत विभाग में बतौर व्याख्याता 1990 में आपकी नियुक्ति हुई, यहीं प्रवाचक और प्रोफेसर के पद तक आपकी प्रोन्नति हुई। आपके निर्देशन में 7 छात्र पी.एचडी. तथा 2 एम.फिल. हुए। संस्कृत में अनूठी विद्वत्ता के कारण इंग्लैण्ड, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्ज़रलैण्ड, मंगोलिया आदि राष्ट्रों की अकादमिक यात्राओं हेतु आपको अवसर प्राप्त हुए। आपने विभिन्न विश्वविद्यालयों में चलने वाली पुस्तकों वाक्त्रयी, वेदविद्या, प्रवेशिका, स्वप्नवासवदत्तम् आदि का सम्पादन किया। सागरिका और नाट्यम् आदि पत्रिकाओं के सम्पादन में आपका सक्रिय योगदान अविस्मरणीय है। सागर वि. वि. में पाण्डुलिपि संसाधन केन्द्र आपके पुरुषार्थ से स्थापित हो सका। डॉ. दाश ने शासकीय अनुदान से शोध परियोजनाएं संचालित कीं।

वे संस्कृत के अतिरिक्त उड़िया, बांग्ला, तेलुगु, मराठी, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं के ज्ञाता थे। शास्त्रों के साथ ही टेक्नोलॉजी पर भी उनकी अच्छी पकड़ थी। कंप्यूटर के वे अच्छे जानकार थे। उन्होंने गवेषिका सॉफ्टवेयर का निर्माण किया था। उनकी पत्नी डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कन्या छात्रावास में कार्यरत रहीं। उनकी एक पुत्री ने अमेरिका से पीएच.डी. उपाधि प्राप्त की है। दूसरी पुत्री ने चिकित्सा के क्षेत्र में उपाधि प्राप्त की है।

लन्दन में अध्यापन के दौरान उन्हें असह्य उदर पीड़ा लीवर कैंसर के रूप में विदित हयी। इसके बावजूद इनका संस्कृत सेवा का कार्य चलता रहा। पॉन्डिचेरी में 05/06/2009 को शास्त्र और टेक्नोलॉजी के इस अद्वितीय विशेषज्ञ ने अन्तिम साँस ली ।

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