काशी में शास्त्र परंपरा के लिए ख्याति प्राप्त परिवार में इनका जन्म 16.10.1954 को महामहोपाध्याय पंडित सीताराम शास्त्री के यहां हुआ। वे काशी हिन्दू वि.वि. के व्याकरण विभाग में प्रोफेसर थे। प्रो. बाल शास्त्री की माता अत्यंत धार्मिक प्रवृत्ति की एक आदर्श गृहिणी थीं। प्रो. बाल शास्त्री ने अपना अध्ययन प्राच्य पद्धति से अपने पिता के निर्देशन में किया। काशी हिन्दू वि.वि. से व्याकरणाचार्य स्वर्ण पदक सहित साहित्याचार्य, एम. ए. संस्कृत, साहित्यरत्न परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। 1977 में प्रो. नारायण मिश्र के निर्देशन में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। ये तीन भाई, दो बहन हैं। इनका विवाह 18 मई 1974 को गोरखपुर के एक प्रतिष्ठित परिवार में सुमित्रा शास्त्री के साथ संपन्न हुआ। इनका इकलौता पुत्र श्री शेखर शास्त्री बीटेक, एम.बी.ए. की शिक्षा प्राप्त कर अमेरिका में सेवारत है। मई 1979 में सागर विश्वविद्यालय में इनकी लेक्चरर पद पर नियुक्ति हुई ।
फिर अक्टूबर, 1984 से मार्च, 1997 तक प्रवाचक के पद पर कार्यरत रहे। मार्च 1997 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के व्याकरण विभाग में प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हो गए। यहीं से 30 जून 2020 को ये सेवानिवृत हो गए, संयोग की बात है कि इनके पिताजी भी इसी विभाग से सेवानिवृत हुए थे। ये अपने कार्यकाल में 3 वर्ष तक संकाय प्रमुख तथा 12 वर्ष तक व्याकरण विभाग के अध्यक्ष रहे हैं।
इनके निर्देशन में 37 छात्रों ने पीएच.डी. दो ने डी. लिट्. तथा चार विद्यार्थियों ने एम. फिल. की उपाधि प्राप्त की हैं। इनको राजस्थान संस्कृत अकादमी जयपुर द्वारा बाणभट्ट पुरस्कार, चातुर्वेद विद्वत परिषद से से संस्कृत सेवा सम्मान, उत्तरप्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति से शास्त्रार्थ श्री सम्मान, अखिल भारतीय विद्वत परिषद से विद्वदलंकरण सम्मान प्राप्त हुआ है। संस्कृत मातृभाषा वाला यह भारत का पहला एक अनूठा परिवार है। वर्तमान में काशी विश्वनाथ मंदिर में मानित पर्यवेक्षक आचार्य तथा अनेक शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष आदि के रूप में कार्यरत हैं। इनकी 20 पुस्तकें, 40 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं। शैक्षणिक कार्य से नेपाल, चीन, मॉरीशस, कनाडा तथा अमेरिका आदि देशों की यात्रा कर चुके हैं। ये स्वयं का प्रचार न करते हुए शास्त्र परंपरा के संरक्षण हेतु समर्पित हैं। ये भारत के शीर्षस्थ व्याकरणज्ञों में माने जाते हैं । शास्त्र परंपरा के संरक्षक व्याकरण के शीर्षस्थ आचार्य प्रोफेसर बाल शास्त्री वर्तमान में वाराणसी में शास्त्र अध्ययन करते हुए आनंदमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।