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पं. छोटेलाल मिश्रा शास्त्री

संस्कृत व्याकरण के मूर्धन्य विद्वान एवं संस्कृत अध्यापन को समर्पित पंडित श्री छोटेलाल मिश्रा शास्त्री का जन्म 12 जून, 1923 को सागर जिले के किल्लाई नामक ग्राम में पिता कन्हैयालाल एवं माता गिरजा बाई के द्वितीय पुत्र के रूप में हुआ था । आपकी प्रारंभिक शिक्षा सिहोरा गांव के शासकीय प्राथमिक विद्यालय से हुई थी। इसके बाद उन्होंने 1948 में गोयनका संस्कृत महाविद्यालय काशी से पुराणेतिहास में शास्त्री की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसी दौरान आपने निखिल भारतीय आयुर्वेद विद्यापीठम से आयुर्वेद विशारद की पदवी प्राप्त की। आपने संस्कृत महाविद्यालय ब्रह्मचर्य आश्रम, धर्मश्री, सागर में जीवन पर्यंत अध्यापन का कार्य किया जहां आप प्रधान अध्यापक के पद पर भी सुशोभित हुए । वे इस संस्था के प्रति जीवन पर्यंत समर्पित रहे। आपका विवाह सावित्रीबाई से हुआ जिनसे आपको 6 संतान प्राप्त हुई। आपने अनेक पुस्तकों का संस्कृत से हिंदी में अनुवाद किया। जिसके लिए आपको 1967 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया एवं 1973 में माननीय मुख्यमंत्री श्री प्रकाश चंद सेठी द्वारा सम्मानित किया गया । आपको संस्कृत में कविताएं लिखने का शौक था । वन्दे भारतम् नामक रचना आपकी बहुत प्रसिद्ध हुई ।आपको श्रीमद्भागवत महापुराण के 18000 श्लोक कंठस्थ याद थे। श्रीमद्भागवत पुराण का आपने अध्यापन कार्य भी किया । इनकी शिष्य परंपरा में पंडित पालीवाल जी, डॉ रामकुमार खम्परिया, पंडित वासुदेव द्विवेदी जैसे मनीषी आते हैं। शास्त्री जी शान्त स्वभाव के और अल्पभाषी रहे। इन्होंने अपने सेवा काल में कभी कोई अवकाश नहीं लिया। 11 मई, 1993 के दिन आपका दुखद निधन हो गया ।

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