तोड़ा पाली नामक गाँव में कन्याकुब्ज ब्राह्मण परिवार में पं. रघुवर प्रसाद शास्त्री के यहाँ 22 अप्रैल 1904 को इनका जन्म हुआ। माताजी श्रीमती जगरानी ने इन्हें अच्छे संस्कार दिए। इन्होंने प्राथमिक कक्षा ग्राम जरुआखेड़ा से तथा मिडिल स्कूल परीक्षा शनिचरी स्थित पाठशाला से उत्तीर्ण की । संस्कृत में स्वतः रुचि होने के कारण होशंगाबाद, संस्कृत पाठशाला चकरा घाट से व्याकरण, साहित्य आदि का अध्ययन किया। कुछ समय पश्चात् धर्मश्री स्थित पाठशाला से व्याकरण में शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की। बनारस से व्याकरणाचार्य की उपाधि प्राप्त की। शास्त्री जी मूलतः वेद और व्याकरण के विशेष ज्ञाता थे। आपने धर्मश्री पाठशाला सागर में तथा प्रो. रामजी उपाध्याय के विशेष अनुरोध पर संस्कृत पाठशाला ढाना में भी अध्यापन कार्य किया।
इनका विवाह श्रीमती उर्मिला तिवारी से हुआ। शास्त्री जी की 8 संतान हुई। आपने अध्यापन और भागवत आदि कथा प्रवचनों को अपनी जीविका का साधन बनाया। इन्होंने 100 से अधिक विविध यज्ञों में आचार्य की भूमिका निभाई। इन्होंने पंडित राधेलाल सिलाकारी से वेदों का विधिवत अध्ययन किया। इनकी शिष्य परंपरा में अंतरराष्ट्रीय विद्वान प्रो. वागीश शास्त्री तथा पं. प्रेमनारायण द्विवेदी आदि हैं। बहुत लंबे समय तक ये धर्मश्री संस्कृत पाठशाला और वृंदावन बाग मंदिर में प्राचार्य रहे।
संस्कृत के क्षेत्र में इनका सबसे बड़ा योगदान यह रहा कि इन्होंने 1969 में झंडा चौक, गोपालगंज स्थित अपने निवास पर ही ऋषिकुल लोकप्रिय दर्शन सिद्धांत विद्यालय की स्थापना की। छात्रों के निशुल्क भोजन तथा आवास आदि की व्यवस्था तथा बनारस से आयोजित परीक्षाओं में बिठाकर उन्हें योग्य पंडित बनाया। आज भी यह पाठशाला अनवरत रूप से चल रही है। इनके पुत्र उमाकांत मिश्रा इसका संचालन कर रहे हैं। श्यामलम् संस्था प्रत्येक वर्ष दिव्य भव्य समारोह आयोजित कर संस्कृत के किसी विशिष्ट विद्वान को पं. गोविंदप्रसाद शास्त्री संस्कृत सम्मान प्रदान करती है। आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी (पूर्व कुलपति) ने अपनी किताब विद्वत् परिचायिका में शास्त्री जी का उल्लेख किया है।
वृद्धावस्था में उनके प्रिय शिष्य छोटे महाराज ने उनकी पूर्ण मनोयोग से सेवा शुश्रूषा की। हमेशा धोती-कुर्ता, सौम्य व्यक्तित्व और हंसमुख देदीप्यमान चेहरा आपकी विशिष्ट पहचान रहा। संपूर्ण जीवन आनंद के साथ बिताते हुए 94 साल की आयु पूर्ण कर दिनांक 28.03.1998 को ये ब्रह्मलीन हो गए।