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डॉ. योगेश पाण्डेय

इनका जन्म 01/10/1916 को जम्मू में प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता पं. रामदीन पाण्डेय कर्मकाण्ड से जीविकोपार्जन करते थे। इनका परिवार मूलतः ग्राम विधनू, जिला कानपुर, उत्तरप्रदेश का था। डॉ. पाण्डेय अपने माता-पिता की इकलौती सन्तान थे। इनकी सम्पूर्ण शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में सम्पन्न हुयी। का. हि. वि. से इन्होंने साहित्यशास्त्राचार्य, वेदान्तशास्त्राचार्य, वेदशास्त्री और ऋग्वेदाचार्य जैसी कठिन उपाधियाँ प्राप्त की। वेदान्त शास्त्री में इन्हें स्वर्णपदक प्राप्त हुआ। इतनी उपाधियाँ प्राप्त करने वाले उस काल के ये अकेले विद्वान रहे । इसके बाद इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 'संस्कृत गद्य का विकास' विषय पर गहन शोध कर पी.एचडी. की उपाधि अर्जित की। इतनी उपाधियाँ अर्जित करने के बावजूद आपकी ज्ञानपिपासा शान्त नहीं हुई और आपने स्वाध्यायी छात्र के रूप में सागर विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एम.ए. की उपाधि भी प्राप्त की।

सागर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में 1959 में डॉ. पाण्डेय की नियुक्ति सहायक प्राध्यापक के रूप में हुयी। इनके शोधनिर्देशन में 5 शोधार्थियों ने शोधकार्य कर पी.एचडी. उपाधियाँ प्राप्त कीं । पश्चात् ये सभी शोधार्थी शिष्य विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्यापक के रूप में नियुक्त हुये। संस्कृत, हिन्दी तथा दर्शनशास्त्र विभाग में समय-समय पर होने वाले व्याख्यानों की शृङ्खला में डॉ. पाण्डेय सहभागी विद्वानों के समक्ष ऐसे क्लिष्ट प्रश्न रख देते थे कि अधिकांश विद्वान प्रायः निरुत्तर से हो जाते थे। यह डॉ. पाण्डेय की विषयविशेषज्ञता और निष्णात होने का प्रमाण था। सागर विश्वविद्यालय में पदस्थापना के पूर्व आपने अनेक महत्वपूर्ण संस्थाओं में अपनी सेवायें दीं। डॉ. पाण्डेय की धर्मपत्नी डॉ. उमा पाण्डेय संस्कृत, अँग्रेजी एवं दर्शन में स्नातकोत्तर होने के साथ-साथ पीएच.डी. एवं डी. लिट् उपाधियों से विभूषित विदुषी रहीं । इन्होंने भी जम्मू, सागर तथा भोपाल के विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया । पाण्डेय दम्पती के दो पुत्र और एक पुत्री है और सभी यथोचित पदों पर शोभायमान हैं। डॉ. योगेश पाण्डेय 1976 में सागर वि वि से सेवानिवृत्त होकर अपने पुत्रों के साथ भोपाल में निवासरत थे। आपने 1984 में ब्रह्मलीन होकर इस संसार से विदा ली।

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