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तीन पाख दो पानी। जे आई कुटक दे रानी।।

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तीन पाख दो पानी। जे आई कुटक दे रानी।।

info अर्थ:

कोदों, समा की तरह कुटकी वर्षा ऋतु में होने वाला एक हलका खाद्यान्न है। अन्य सब अनाजों की अपेक्षा उसकी फसल शीघ्र आ जाती है। वर्षा ऋतु में दो बार पानी बरसा नहीं कि तीन पखवारे में वह कटने योग्य हो जाती है। कहावत में यही कहा गया है।