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मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं विरंचि सम।

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मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं विरंचि सम।

info अर्थ:

मूर्ख आदमी को ब्रह्मा भी नहीं समझा सकते।

menu_book उदाहरण:

गोस्‍वामी तुलसीदासकृत सोरठा की पहली पंक्ति है- "फूलहिं फलहिंन बेंतजदपि सुधा बरसहिं जलद"