बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
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रात भर मिमयानी, एक बुकेरू ब्यानी। / रात भर रोये, मरौ एकऊ नईं। / रात भरे दिन रीते। पेटन नें जग जीते।।
रात भर मिमयानी, एक बुकेरू ब्यानी। / रात भर रोये, मरौ एकऊ नईं। / रात भरे दिन रीते। पेटन नें जग जीते।।
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रात भर मिमयानी, एक बुकेरू ब्यानी। / रात भर रोये, मरौ एकऊ नईं। / रात भरे दिन रीते। पेटन नें जग जीते।।
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अर्थ:
पेट से संसार हारा है। रात में भरो, दिन में खाली।
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