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सावन में पुरवैया भादों में पछयाव। / हवारे हर छाँड़ के लरका जाय जिवाव।।

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सावन में पुरवैया भादों में पछयाव। / हवारे हर छाँड़ के लरका जाय जिवाव।।

info अर्थ:

सावन में यदि पुरवाई और भादों में पछवाँ चले तो फिर सूखा पड़ता है। ऐसी अवस्था में किसान को खेती की आशा छोड़ बाल-बच्चों के भरण-पोषण के लिए कोई दूसरा धंधा करना चाहिए।