सीख तौ बाकों दीजिए, जाकों सीख सुहाय। / सीख न दीजे बाँदरे, घर बैय्या कौ जाय।।
info अर्थ:
मूर्ख को उपदेश नहीं देना चाहिए।
menu_book उदाहरण:
कथा- किसी जंगल में बबूल के एक पेड़ पर बया पक्षी का एक जोड़ा रहता था। एक दिन जब वे दोनों अपने घोंसले में आनंद से बैठे हुए थे बाहर जोर का पानी बरसने लगा। इतने में वर्षा के जल से भींगा और ठंड से कांपता हुआ एक बंदर आया और वहीं पेड़ के नीचे बैठ गया। उसे इस तरह भींगा हुआ देखकर बया की स्त्री ने कहा:- मानस कैसे हाथ पाँव, मानस कीसी काया। / चार महीने वर्षा बीती, छप्पर क्यों नहि छाया।। सुनकर बन्दर को बड़ा क्रोष आया और उसे गाली देकर बोला कि अरी चुड़ैल, तेरी इतनी घृष्टता कि मेरी हँसी उड़ाती है। ले अभी तुझे इसका मजा चखाता हूँ। बया ने अपनी स्त्री को समझाया कि तू काहे को बीच में पड़ती है। जब कोई स्वयं कोई बात पूछे तभी कहना चाहिए। परन्तु तब तक बंदर ने पेड़ पर चढ़ कर उनके घोंसले को टुकड़े-टुकड़े करके फेंक दिया। यह कुटी दूषक जातक है। पंचतंत्र में इसकी कथा मिलती है। (1।18) और कथा-सरित्सागर में भी।