(1.प्रसर, विस्तार, खुला मैदान। डोरों को रात्रि के समय खुले मैदानों अयवा खेतों पर ले जाकर स्वतंत्रतापूर्वक चरने के लिए छोड़ देने को पसर चराना कहते हैं। पसर प्रायः चोरी से ही चरायी जाती है। दूसरों के खेतों की मेंड़ों पर चुपचाप ढोर छोड़ दिये जाते हैं।) कोरी की भैंस में इतना साहस कहाँ जो रात्रि में दूसरों के खेतों पर घास, चरने जा सके ? सीधे और दब्बू मनुष्य से साहसपूर्ण कार्य की आशा व्यर्थ है।