बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
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गैल में पाई फकीरनी1, गुर बाँटो न सिन्नी।
गैल में पाई फकीरनी1, गुर बाँटो न सिन्नी।
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गैल में पाई फकीरनी1, गुर बाँटो न सिन्नी।
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अर्थ:
(1-वह रंगीन डोरा जो मुहर्रम के दिनों में ताजिए पर गुड़, शर्बत या मिठाई चढ़ाने के बाद प्रसाद के रूप में गले में पहिनने को मिलता है। यह छोटे बच्चों को पहिनाते हैं।) रास्ते चलते फकीरी मिल गयी, न गुड़ बाँटना पड़ा और न मिठाई। अर्थात मुफ्त में काम हो गया।
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