बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: ग

अक्षर 'ग' से शुरू होने वाली कहावतें

arrow_back वापस जाएं

गई गुजरी हुई।

जो होना था हो गया, उसकी चर्चा क्या ?

गई परथन लैन, कुत्ता पींड़1 लै गओ।

(1-गुँदे हुए आटे की पिडी।) एक काम करने गये तब तक दूसरा चौपट हो गया।

गंगा की गैल में मदारन1 के गीत।

गंगा के रास्ते मदार के गीत। बैमौके का काम।

गंगा गयें मुंडायें सिद्ध।

सामने आ गये काम को पूरा कर डालने में ही समझदारी है।

गंगा नहाबो।

झगड़े से छुट्टी पाना। किसी काम की जिम्मेवारी से मुक्त होना।

गड़वाँत1 के पथरा।

(1-गाड़ी के आने-जाने का कच्चा रास्ता।) ऐसा निरीह और असहाय व्यक्ति जिसे चाहे जो रौंदता और कुचलता चला जाय।

गढ़ै कुमाँर बरते संसारा।

एक के परिश्रम से सबको लाभ होता है।

गदन की गोने1, मनन की झोलें।

(1-गोन का ब. ब., बढ़ी खेस जिसमें लगभग पांच मन अनाज आता है।) थोड़े हिसाब-किताब में लंबी-चौड़ी भूल।

गदन की बातें, लड़इयन की लातें।

गधों की बातें और गीदड़ों की लातें। मूर्ख की बेतुकी बात।

गदन खाओ खेत पाप न पुन्न।

मूर्खों को खिलाना-पिलाना व्यर्थ है।

गदा के कान गदई खुजाउत।

गधा के कान गधा ही खुजाता है। ओछों की मित्रता ओछों से ही होती है।

गदा गदइया से जीते नई, रेंगटा1 के कान मरोरे।

(1-गधा का बच्चा।) गधा गधी से तो जीतता नहीं बच्चे के कान ऐंठता है।

गदा दाखें खा गये।

मूर्खों के खिलाने पिलाने में पैसा खर्च हुआ।

गदा धोये से घोड़ा नई होत।

प्रयत्न करने पर भी किसी की प्रकृति नहीं बदली जा सकती।