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अक्षर: उ

अक्षर 'उ' से शुरू होने वाली कहावतें

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उअते खों सब पाँ लागत।

उगते सूर्य को सब नमस्कार करते हैं। उन्नतिशील के आगे सब झुकते हैं।

उकताने काम नसाने, धीरज धरो सयाने।

जल्दबाजी में काम बिगड़ता है, इसलिए चतुरों को धैर्य से काम लेना चाहिए।

उखरी में मूँड़ दओ, तौ मूसरन कौ का डर।

जब कोई भला या बुरा काम करने पर उतारू ही हुए तो फिर डर किस बात का ?

उँगरकटा नाव घर दो।

उँगली काट खाने वाला नाम रख दिया। व्यर्य बदनाम कर दिया।

उँगरियन उँगरियन कौंचा1 भारी होत।

(1.हथेली, कलाई।) उँगलियों उँगलियों कौंचा भारी होता है। बोड़ा- थोड़ा करके बहुत हो जाता है।

उंगरिया पकर के कौंचा पकरवो।

उँगली पकड़ कर पहुँचा पकड़ना। थोड़ा सहारा पाकर गले पड़ जाना।

उजरऊ1 के संगे कपला2 कौ नास।

(1.उजाड़ करने वाली, चोरी से दूसरों का खेत चरने वाली गाय। 2.कपिला-सीधी गाय।) बुरे के साथ सीधे आदमी को भी कष्ट भोगना पड़ता है।

उजरे गाँव में अरंडई रूख।

जहाँ कोई वृक्ष नहीं होता वहाँ अरंड को ही लोग बड़ा वृक्ष मानते हैं।

उजरे गाँव में मातेन1 कचरिया !

(1.कचरी की एक जाति जो आकार में बड़ी और मीठी होती है।) उजड़े गाँव में श्रेष्ठ जाति की कचरिया! आश्चर्य का विषय।

उजार चरें और प्याँर खायें !

चोरी से दूसरों का खेत चरने जायें, फिर भी कोदों के डंठल खायें ! बुरा काम भी करें और पूरा लाभ न उठायें !

उठते पाँव दुनिया तकत।

पदच्युत होते हुए व्यक्ति पर सबकी दृष्टि रहती है। सब उसकी संकटापन्न स्थिति से लाभ उठाना चाहते हैं।

उठी हाट आठयें दिना लगत।

उठी हाट आठवें दिन लगती है, (इससे जो कुछ लेना हो सो आज ही ले लो।) तात्पर्य यह कि अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।

उठौवल चूल्हो।

ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त जिसके रहने का कोई पक्का ठिकाना न हो।

उड़त चिरइयाँ परखत।

उड़ती चिड़ियाँ परखता है अर्थात बहुत होशियार है।

उड़ौ चून पुरखन के नाव।

चक्की पीसते समय जो चून उड़ गया या नष्ट हो गया वह पितरों को सर्पित ! किसी को ऐसी वस्तु देकर अहसान करना जो अपने काम न आये।

उतराई1 कैसो टका दैं राखो।

(1.नदी से पार होने का महसूल।) चुपचाप किसी की रकम का भुगतान कर देने पर प्रयुक्त।

उधरे पै सुधरै।

सिले हुए कपड़े को उधेड़ कर ही फिर से ठीक किया जा सकता है।

उधार कौ खाबो और फूस को तापबो।

उधार का खाना और फूस का तापना बराबर होता है। जैसे फूस की आग अधिक देर नहीं ठहरती वैसे ही उधार लेकर खाना भी बहुत दिनों नहीं चल सकता।

उधार देओ और बेर बिसाव !

किसी को ऋण देना ठीक नहीं। माँगने से बुराई पैदा होती है।