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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: ए

अक्षर 'ए' से शुरू होने वाली कहावतें

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एक अहारी सदा व्रती।

एक बार भोजन करने वाला संयमी ही माना जाता है।

एक कओ, न दो सुनो।

किसी से न एक बुरी बात कहो, न दो सुनो।

एक की दो बनाउत।

एक की दो बनाते हैं। झूठा दोषारोपण करना।

एक कुँजरिया न आहै तौ का हाट न भरहै ?

एक कुंजड़िन यदि नहीं आयेगी तो क्या हाट नहीं भरेगी ? किसी एक आदमी के बिना काम पड़ा नहीं रह जायेगा।

एक के पुन्न से सबरो गाँव तर जात।

एक आदमी के अच्छे काम का सब पर प्रभाव पड़ता है।

एक घड़ी कौ बुरआसन1 जनम भरे कौ सुक्ख।

(1.बुराई।) नाहीं करने से कोई बुरा मान जाय तो मान जाय, पर हमेशा के लिए बला तो टल जाती है।

एक घर तौ डाँकन बरका देत।

एक घर तो डायन भी छोड़ देती है। दुष्ट आदमी के हृदय में भी कुछ-न-कुछ दया होती है।

एक जन से दो भले।

कहीं यात्रा में जाना हो तो एक से दो अच्छे।

एक जीव दो कठारा।

एक जीव, दो देह। घनिष्ठ प्रेम।

एक टका दायजो, नौ टका उपरैती।

दहेज में तो एक टका मिला, और पुरोहित को दक्षिणा देनी पड़ी नौ टका। लाभ से हानि अधिक।

एक तबा की रोटी, का छोटी का मोंटी।

समान वस्तुओं में छोटी-बड़ी का क्या प्रश्न।

एक तो गड़ेरिन1 और लासन खायें।

(1.गड़रिया की स्त्री।) गंदगी में और भी गंदगी।

एक तौ बाई नाचनी और घुँघरू पैरें बाजनी।

एक तो नाचने का शौक, और ऊपर से पैरों में घुँघरू पहिन रहे हैं। फिर क्या पूछना ? मनचीती हो गयी।

एक तौ रोउत्तीं और मुंस ने मारो।

एक तो पहिले से रो रही थी, फिर पति ने मार दिया। रोने का और बहाना मिल गया। ऊँघते को ठेलते का बहाना।

एक दिना कौ पावनों, दो बिना कौ पई1, तीसरे दिना रये तौ बेसरम सई।।

(1.पथिक।) मेहमानदारी तो एक दिन की ही ठीक होती है, दो दिन रहे तो मुसाफिर है, और तीन दिन रहने वाला बेशरम।

एक नकटा सौ खों नकटा कर देत।

एक बुरा आदमी सौ को बुरा बना देता है।