अक्षर: छ
अक्षर 'छ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंछछूँदर1 छोड़ बो।
(1--एक छोटी आतिशबाजी जो आग लगने पर बहुत तेज चक्कर काटती हुई जमीन पर भागती है।) ऐसी बात कह देना जिससे दो आदमियों में बैठे-ठाले झगड़ा हो जाय।
छटी कौ खाव-पिओ सब निकर गओ।
छटी का खाया-पिया सब निकल गया। बड़ा परिश्रम करना पड़ा। छठी का दूध याद आ गया।
छठपती, घटे पाप, बढ़े रती।
छींक आना, कुछ विशेष अवस्थाओं में, अशुभ मानते हैं। अतः किसी के छींकने पर छींक के दोष को दूर करने के लिए कहते हैं।
छाती पै उर्दा (मूंग या कोदों) दरबो।
किसी के सामने ही ऐसा काम करना जिससे उसका जी दुखे।
छाती पै धर के कोऊ नहीं लै जात।
धन के लिए कहते हैं कि जब तक जीवन है तब तक धन है।
छाती पै पथरा धरो।
छाती पर पत्थर रखा है। ऐसा भारी दुःख है जिसे प्रकट नहीं किया जा सकता।