बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: फ

अक्षर 'फ' से शुरू होने वाली कहावतें

arrow_back वापस जाएं

फटे लुँगरे और बूड़े बाप-मताई की काँ नों लाज-सरम करें ?

न तो फटे लुँगरे को ही अलग किया जा सकता है, और न बूढ़े माँ-बाप या सास-ससुर को ही। उनको लेकर काम चलाना ही पड़ता है।

फट्टा लौट गओ !

व्यापार में हानि हो गयी। दिवाला निकल गया।

फरिया न सारी, बड़ी सोभा हमारी।

पहिनने को न तो फरिया है न साड़ी, फिर भी अपने को बहुत सुन्दर समझती है।

फाग की फाग खेल लई और आंग बचा लओ।

अपना काम बना कर चुपचाप अलग हो जाना और दूसरों को आलोचना का अवसर न देना।

फाग के कुटे और दिवारी के लुटे कों कोऊ नई पूँछत।

होली के हुल्लड़ में यदि कोई पिट जाय और दिवाली में जुए में हार जाय तो उसके लिए कौन चिन्ता करता है?

फाग खेलत और आँग बचाउत।

झगड़े में पड़ना भी चाहते हैं और अपने को अलग भी रखना चाहते हैं, ये दोनों बातें कैसे संभव हैं ?

फिकर फकीरे खाय।

चिन्ता तो फकीर को भी खा जाती है।

फिकार1 सें अजवान बनाउत फिरत।

(1-एक मोटा अनाज।) ऊट-पटाँग काम करना। किसी साधारण वस्तु से बड़ी कीमती वस्तु बनाने का प्रयत्न करना।

फिर बेई मोची के मोची।

जैसे थे वैसे ही फिर हो गये।

फिरै तौ चरै।

मैदान में चलने-फिरने ही से पशु को चरने के लिए घास मिलती है। एक जगह बैठे रहने से पेट कैसे भर सकता है?

फूटी तौ सयें आँजी न सयें।

आँख फूट जाय वह स्वीकार, परन्तु अंजन का कष्ट सहना स्वीकार नहीं। थोड़े से खर्च या असुविधा के पीछे अपनी बड़ी हानि कर लेना।

फूटे बासन पै कलई करबो।

पुरानी वस्तु को नयी बनाने का व्यर्थ प्रयत्न करना।

फूँद में हो सरक गये।

किसी काम की जिम्मेवारी से अपने को होशियारी से बचा ले गये।

फूल तौ कपास कौ और फूल काय कौ। दूद तौ माय कौ और दूद काय कौ। / पूत तौ गाय कौ और पूत काय कौ। राजा तौ मेघराज और राजा काय कौ।

कपास का फूल, माँ का दूध, गाय का बछड़ा जो बड़ होकर बैल बनता है और इन सबका पोषण करने के लिए जल प्रदान करने वाले बादल ही राजा हैं।