अक्षर: फ
अक्षर 'फ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंफटे लुँगरे और बूड़े बाप-मताई की काँ नों लाज-सरम करें ?
न तो फटे लुँगरे को ही अलग किया जा सकता है, और न बूढ़े माँ-बाप या सास-ससुर को ही। उनको लेकर काम चलाना ही पड़ता है।
फरिया न सारी, बड़ी सोभा हमारी।
पहिनने को न तो फरिया है न साड़ी, फिर भी अपने को बहुत सुन्दर समझती है।
फलाने की मताई ने मुंस करो, बुरओ करो, कई छोड़ दओ, और बुरओ करो।
दे. तुमाई मताई।
फाग की फाग खेल लई और आंग बचा लओ।
अपना काम बना कर चुपचाप अलग हो जाना और दूसरों को आलोचना का अवसर न देना।
फाग के कुटे और दिवारी के लुटे कों कोऊ नई पूँछत।
होली के हुल्लड़ में यदि कोई पिट जाय और दिवाली में जुए में हार जाय तो उसके लिए कौन चिन्ता करता है?
फाग खेलत और आँग बचाउत।
झगड़े में पड़ना भी चाहते हैं और अपने को अलग भी रखना चाहते हैं, ये दोनों बातें कैसे संभव हैं ?
फिकार1 सें अजवान बनाउत फिरत।
(1-एक मोटा अनाज।) ऊट-पटाँग काम करना। किसी साधारण वस्तु से बड़ी कीमती वस्तु बनाने का प्रयत्न करना।
फिरै तौ चरै।
मैदान में चलने-फिरने ही से पशु को चरने के लिए घास मिलती है। एक जगह बैठे रहने से पेट कैसे भर सकता है?
फूटी तौ सयें आँजी न सयें।
आँख फूट जाय वह स्वीकार, परन्तु अंजन का कष्ट सहना स्वीकार नहीं। थोड़े से खर्च या असुविधा के पीछे अपनी बड़ी हानि कर लेना।
फूँद में हो सरक गये।
किसी काम की जिम्मेवारी से अपने को होशियारी से बचा ले गये।
फूल तौ कपास कौ और फूल काय कौ। दूद तौ माय कौ और दूद काय कौ। / पूत तौ गाय कौ और पूत काय कौ। राजा तौ मेघराज और राजा काय कौ।
कपास का फूल, माँ का दूध, गाय का बछड़ा जो बड़ होकर बैल बनता है और इन सबका पोषण करने के लिए जल प्रदान करने वाले बादल ही राजा हैं।