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4 • वि. वह बहुत बड़ा कपड़ा जो नाव के मस्तूल में इसलिए बाँधा जाता है कि उस पर पड़ने वाले हवा के दबाव से नाव तेजी से चले, तम्बू. उ [4 • वि. वह बहुत बड़ा कपड़ा जो नाव के मस्तूल में इसलिए बाँधा जाता है कि उस पर पड़ने वाले हवा के दबाव से नाव तेजी से चले, तम्बू. उ]

वि.
4 • वह बहुत बड़ा कपड़ा जो नाव के मस्तूल में इसलिए बाँधा जाता है कि उस पर पड़ने वाले हवा के दबाव से नाव तेजी से चले, तम्बू.

पइ [pai]

सं.स्त्री.
टाट के ऊपर रुपड़ों की कतार.

पइयाँ [paiyAM]

सं.पु.
पहिया, चक्र.

पइसा [paisA]

सं.पु.
ताँबे की मुद्रा, दशमलव प्रणाली में रुपये का सौवाँ भाग.

पउआ [pauA]

सं.पु.
चौथाई भाग, किसी वस्तु का 1/4 भाग.

पकवान [pakavAn]

सं.पु.
तले हुए विविध प्रकार के भोज्य पदार्थ जो अन्न से बने होते हैं.

पकाबौ [pakAbau]

क्रि.स.
किसी वस्तु जैसे ईंट, मिट्टी के बर्तन आदि को आग में तपाकर ठोस रूप देना या मजबूत करना.

पकुँआँ [pakuMAM]

वि.
कमजोर, जिसका शरीर रोग से या मिथ्याचार से पीला पड़ गया हो.

पकौरी [pakaurI]

सं.स्त्री.
बड़ी, पकौड़ा, एक पकवान जो बेसन आदि को तेल में पकाकर बनाया जाता है.

पक्कायत [pakkAyat]

सं.स्त्री.
शादी के लिए रिश्ता पक्का करने के लिए वर के माथे पर तिलक लगाना.

पक्कौ [pakkau]

वि.
मजबूत, पूरी तरह, किसी काम में पूर्णता प्राप्त करना.

पक्खा [pakkhA]

सं.पु.
घर की चौड़ी दीवारें जिन पर टाट की बीचवाली लकड़ी रखी जाती है.

पक्यात [pakyAt]

सं.स्त्री.
जब सगाई पक्की हो जाती है तो इसे कन्या पक्ष की ओर से पक्यात कहा जाता है.

पख [pakh]

सं.स्त्री.
आपत्ति, आपेक्ष, अड़ंगा.

पखना Variant: वै.रू. पखउआ. [pakhanA]

सं.पु.
पंख, पक्षियों के पर.

पखरी [pakharI]

सं.स्त्री.
पंखुड़ी, फूल के दल.

पखवारौ [pakhavArau]

सं.पु.
पक्ष, पंद्रह दिन के समय की इकाई.

पखा [pakhA]

सं.पु.
दाड़ी के बड़े-बड़े बाल.

पंखा [pankhA]

सं.पु.
पक्षियों के डेंने.