बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: प

अक्षर 'प' से शुरू होने वाले शब्द

arrow_back वापस जाएं

पचबौ [pacabau]

क्रि.अ.
हजम होना, किसी वस्तु का सड़ने.

पंचर [pancar]

सं.पु.
ट्यूब, फुटबाल आदि में हुआ छेद.

पचरा [pacarA]

सं.पु.
गाड़ी की जुआँरी जिसमें बैल निश्चित स्थान पर जुड़कर गाड़ी खींचते हैं.

पंचलकड़ी [pancalakaRI]

सं.स्त्री.
शव-दाह के समय की रस्म जिसमें शवयात्रा में जाने वाले लोग चिता में लकड़ी डालकर परिक्रमा करते हैं.

पचलरा [pacalarA]

सं.पु.
पाँच लरों से बना गहना.

पंचा [pancA]

सं.पु.
पाँच हाथ लम्बी पुरुषों की छोटी धोती.

पंचाउनबै [pancAunabai]

वि.
नौ दहाइयों और पाँच का योग, पाँच कम सौ.

पचाबौ [pacAbau]

क्रि.स.
हजम करना या पचाना.

पंचायती [pancAyatI]

वि.
सार्वजनिक.

पचासा [pacAsA]

सं.पु.
पचास छंदों में लिखी गई कोई रचना.

पचासी [pacAsI]

वि.
अरसी और पाँच का योग.

पंचुवा [pancuvA]

सं.पु.
बिना गुठली पड़े छोटे-छोटे आमों के अचार जिसमें तेल नहीं डाला जाता है.

पंचोटा [pancoTA]

सं.पु.
बाँस की चपटी सींक जिससे गुलेल की तरह कंकड़ फेंककर चोट लगाई जाती है.

पच्चड़ [paccaR]

सं.स्त्री.
किसी छेद में लकड़ी को कसने के लिए लगाई गई लकड़ी, पतली फंटी.

पछताव [pachatAv]

सं.पु.
पश्चाताप, पछतावा किसी कार्य को करने या न करने के पश्चात होने वाला दुःख.

पछयाउर [pachayAur]

सं.स्त्री.
भोजन करने के बाद चबाया जाने वाला पदार्थ.

पछाँउँ [pachAMuM]

वि.
क्रि. पीछे.

पछाड़बौ Variant: वै.रू. पछारबौ. [pachARabau]

क्रि.स.
कुश्ती में हराना, प्रतिस्पर्द्धा में पीछे छोड़ देना.