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डॉ. संजय कुमार

आधुनिक संस्कृत आलोचक के रूप में प्रतिष्ठित डॉ. संजय कुमार का जन्म 06.07.1980 को उ.प्र. के गाजीपुर जिले के अन्तर्गत बड़ागाँव में हुआ है । इनके पिता नाम श्री शंकर सिंह यादव है जो कृषि कार्य में संलग्न हैं । इनकी माता का नाम श्रीमती सुदामी सिंह यादव है। इनके तीन भाई तथा तीन बहिन हैं । इनकी प्राथमिक शिक्षा अपने गाँव में ही संपन्न हुई। इनकी बी.ए., एम.ए. तथा पीएच. डी. की शिक्षा काशी हिन्दू वि.वि. वाराणसी से हुई। साहित्याचार्य की उपाधि सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि.वि., वाराणसी से प्राप्त की। इनका शोधकार्य 'दण्डी की कृतियों में लोक- संस्कृति' विषय पर है । पीएच.डी. हेतु इन्हें आई.सी.एच.आर. से शोध अध्येतावृत्ति भी प्राप्त हुई थी । ये नेट परीक्षा उत्तीर्ण हैं ।

इन्होंने 2009 से 2010 ई. तक डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज वाराणसी में संविदा शिक्षक के रूप में अध्यापन का कार्य प्रारम्भ किया। 2010 से 2011 ई. तक माँ मुराती बालिका महाविद्यालय, बलरामपुर जिला आजमगढ़ में अंशकालिक व्याख्याता रहे । 2011 से 2013 ई. तक श्री विश्वनाथ पी.जी. कॉलेज, कलान, सुल्तानपुर में अध्यापन कार्य किया । मई 2013 में डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के संस्कृत विभाग में स्थायी रूप से सहायक आचार्य पद पर नियुक्त हुए। वहां नाट्यम् शोध पत्रिका के ये प्रबन्ध संपादक रहे। सागरिका पत्रिका के भी संपादक मण्डल के रूप में अपने दायित्व का निर्वाह किया। यहाँ पर अनेक शोध संगोष्ठियों के आयोजन में भी अपना सक्रिय योगदान दिया। इस प्रकार मई 2013 से दिसम्बर 2024 ई. तक डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं देने के पश्चात् दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में सह आचार्य के पद पर दिसम्बर 2024 ई. नियुक्त हो गये ।

इनके लगभग 100 शोध पत्र तथा 10 ग्रंथ प्रकाशित हैं जिनमें संस्कृत महाकाव्य की प्रमाणिक परम्परा आदि ग्रंथ उल्लेखनीय हैं। ये राष्ट्रिय, अन्ताराष्ट्रिय शोध संगोष्ठियों में 70 से अधिक शोधपत्रों का वाचन कर चुके हैं । इन्होंने एन.सी.सी. का 'सी प्रमाणपत्र' भी प्राप्त किया है । सारस्वत योगदान के लिए उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ से दो बार विविध पुरस्कार तथा आर्ष परिषद् सागर द्वारा स्वामी विवेकानन्द सारस्वत सम्मान भी इन्हें प्राप्त हुए हैं ।

इनकी पत्नी श्रीमती मनीषा यादव कुशल गृहिणी हैं। इनके दो पुत्र हैं। इनके निर्देशन में सागर से डॉ. प्रदीप दुबे और एक अन्य पी एच शोध उपाधि प्राप्त कर चुकें हैं तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में चार शोधार्थी कार्य कर रहे हैं ।

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