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प्रो. शिवराम शर्मा

प्रो. शिवराम शर्मा का जन्म 1 अगस्त, 1957 को सागर जिले की खुरई तहसील के ग्राम कनउ में हुआ । इनके पिता वेदांत शास्त्री श्री हरनारायण शर्मा भागवती स्वामी करपात्री जी के अनुयाई शिष्य रहे। इनके पिता कृषि कार्य तथा पुरोहित कार्य से अपनी जीविका चलाते थे। इनकी माता श्रीमती सरस्वती देवी कुशल गृहिणी थी। गांव से ही प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर ये काशी चले गए और वहां से रणवीर संस्कृत विद्यालय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संपूर्ण शिक्षा प्राप्त की। साहित्याचार्य परीक्षा में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। ये साहित्य के साथ साथ गन्धर्व शास्त्र का भी तलस्पर्शी पाण्डित्य रखते हैं। छात्र जीवन में खेलकूद नाटक आदि में भी इनकी रुचि रही। 1983 में रणवीर संस्कृत विद्यालय में अध्यापक पद पर नियुक्त हुए। 2006 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य पद पर नियुक्त हुए जहां इन्होंने सङ्गीत एवं मञ्च कला संकाय में लगभग 10 वर्षो तक सङ्गीतशास्त्र के दुरूह ग्रन्थों का समुचित अध्यापन कराया है। इसके बाद वहीं 2017 में संस्कृत विद्या धर्मविज्ञान संकाय में साहित्य विभाग के प्रोफेसर पद पर नियुक्त होकर 2022 में साहित्यविभाग के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत हुए। इन्होंने संस्कृत साहित्य के पांच महत्वपूर्ण ग्रंथों की संस्कृत और हिंदी में व्याख्या की है । इनके 30 से अधिक प्रकाशनाधीन है। इनके अनेक छात्र महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में शास्त्रीय शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। इनका काव्य संग्रह काव्यकल्लोलिनी अध्यापन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा इन्हें संस्कृत सेवा के •लिए पुरस्कृत किया गया है। पंडित रेवा प्रसाद द्विवेदी इनके आदर्श गुरु रहे हैं। अभी आचार्य अप्पय दीक्षित के प्रसिद्ध ग्रंथ चित्रमीमांसा की विशद व्याख्या का कार्य कर रहे हैं। गांव से बनारस जाने के बाद इनका सागर में आना-जाना नहीं रहा जिससे सागर के विद्वानों के बीच इनकी पहचान नहीं रही। यह विशेष उल्लेखनीय है कि इनकी चारों संतान पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त हैं। इनके पुत्र डॉ. राजीव लोचन शर्मा न्यायदर्शनाचार्य असम राज्य के कुमार भास्कर वर्मा विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य हैं। इनके छोटे भाई प्रोफेसर रामचंद्र शर्मा वर्तमान में लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष हैं। प्रोफेसर शिवराम शर्मा सेवानिवृत्ति के पश्चात काशी में निवास करते हुए सारस्वत साधना में संलग्न हैं।

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