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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: छ

अक्षर 'छ' से शुरू होने वाले शब्द

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छिपटियाँ [chipaTiyAM]

सं.स्त्री.
लकड़ी फाड़ते समय निकलने वाली छोटी-छोटी छिलकेनुमा परत.

छिपनी [chipanI]

सं.स्त्री.
सीप.

छिपी [chipI]

सं.पु.
कपड़े सिलने वाला, दर्जी.

छिपुरिया [chipuriyA]

सं.स्त्री.
सीपी या सीप.

छिबबौ [chibabau]

क्रि.स.
किसी व्यक्ति या वस्तु से छू जाना.

छिबा [chibA]

सं.पु.
स्पर्श.

छिबा छिवउअल [chibA chivaual]

सं.पु.
छोटे बच्चों का खेल, जिसमें बच्चे एक-दूसरे को छूने और छू जाने से बचने का खेल.

छिमा [chimA]

सं.स्त्री.
क्षमा.

छियाँ [chiyAM]

सं.स्त्री.
नाक से निकला हुआ बलगम.

छिरक [chirak]

सं.स्त्री.
बुनाई के दोष के कारण कपड़े में किसी स्थान पर सूत की विरलता.

छिरकबौ [chirakabau]

क्रि.स.
छिड़कना.

छिरका [chirakA]

सं.पु.
छप्पर की विरलता के कारण ऐसे स्थान जहाँ से अंदर धूप आती है.

छिरकौ [chirakau]

सं.पु.
छिड़कने के अर्थ में.

छिरयानों [chirayAnon]

सं.पु.
बकरी बाँधने का स्थान, बकरियों के द्वारा फैलाई गई गंदगी से गंदा स्थान.

छिरारू [chirArU]

सं.स्त्री.
खेतों में पैदा होने वाला एक पौधा जिसका लाल बाली जैसा लंबा फल होता है.

छिरिया [chiriyA]

सं.स्त्री.
बकरी.

छींकबौ [chInkabau]

क्रि.अ.
छींक आना.

छींचड़ा Variant: वै.रू. छींछड़ा. [chIncaRA]

सं.पु.
आँतों आदि का बेकार गोश्त.

छीजबौ [chIjabau]

क्रि.स.
गलना, दाल-चावल का पकना.

छींट [chInT]

सं.स्त्री.
फूल-पत्ती, बेल-बूटे आदि छपा हुआ कपड़ा.