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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: प

अक्षर 'प' से शुरू होने वाले शब्द

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पुंगरिया [pungariyA]

सं.पु.
नाक में फूलनुमा पहने जाने वाला आभूषण.

पुंगा [pungA]

वि.
फूहड़, आवारा, एक गाली.

पुचकारबौ [pucakArabau]

क्रि.स.
किसी को शांत करने या समझाने के लिए चुम्बन लेने जैसी क्रिया.

पुचकारें [pucakAren]

वि.
क्रि. पुचकार-कर दुलारना.

पुचाँड़ा [pucAMRA]

सं.पु.
सफाई करने के लिए वस्त्र को पानी में भिगोना.

पुच्चौ [puccau]

वि.
जिसके अंदर कुछ न हो, पुच्ची बिना दाने की फलियाँ.

पुछइया [puchaiyA]

सं.पु.
पूछने वाला, देख-रेख करने वाला.

पुछना [puchanA]

सं.पु.
झाड़न, पोंछने का कपड़ा.

पुछरेंटबौ [pucharenTabau]

क्रि.स.
पूँछ मरोड़कर जानवरों को हाँकना, काम रोकने के लिए किसी कार्य को निरंतर रोकना.

पुछल्ला [puchallA]

सं.पु.
पीछे लगा रहने वाला.

पुछापुछ [puchApuch]

सं.स्त्री.
टोका-टोकी, अनेक प्रश्नों का सामना करना.

पुंछालौ [punchAlau]

सं.पु.
पतंग के नीचे बाँधी जाने वाली कपड़े की पतली व छोटी पट्टी, जिससे पतंग का संतुलन बना रहता है.

पुजबौ [pujabau]

क्रि.अ.
पूजित होना, लोक मान्यता प्राप्त होना.

पुँजयाबौ [puMjayAbau]

क्रि.अ.
पूँजी इकट्ठी होना.

पुजापौ [pujApau]

सं.पु.
परिवार प्रचलित विशेष पूजा-परंपरा.

पुँजिया [puMjiyA]

सं.स्त्री.
पूँजी.

पुजेरौ Variant: वै.रू. पुजारी. [pujerau]

सं.पु.
मंदिर में पूजा करने वाला पुजारी.

पुरखन [purakhan]

सं.पु.
पूर्वज.

पुरखा [purakhA]

सं.पु.
पूर्वज.

पुरखां [purakhAn]

सं.पु.
त्यौहार.