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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: फ

अक्षर 'फ' से शुरू होने वाले शब्द

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फसकल [phasakal]

सं.स्त्री.
पसर कर बैठने की स्थिति.

फसकुरयाबौ [phasakurayAbau]

क्रि.अ.
दाल आदि से गर्म करने पर झाग आना.

फसली [phasalI]

वि.
मौसमी, रबी की बुआई से लेकर खरीफ की कटाई तक की अवधि का विशेषण.

फसाबौ [phasAbau]

क्रि.स.
आबद्ध करना, ढीले बंधन से जोड़ना, किसी दुर्भावना से फुसलाकर अपने अनुकूल करना.

फसील [phasIl]

सं.स्त्री.
किले के परकोटे की दीवार.

फसूकर [phasUkar]

सं.पु.
झाग, फेन.

फाइल [phAil]

सं.स्त्री.
किसी प्रकरण से संबंधित.

फाँक [phAMk]

सं.स्त्री.
किसी गोल फल का आधे से कम टुकड़ा.

फाँके [phAMke]

सं.स्त्री.
पके हुए कद्दू के बड़े टुकड़े जो भाप पर पकाकर फलाहार में खाये जाते हैं.

फांके [phAnke]

सं.स्त्री.
व्यंजन.

फाँकौ [phAMkau]

सं.पु.
विवशता में होने वाला अनाहार, बिना भोजन के दिन कटने की स्थिति.

फाग [phAg]

सं.स्त्री.
होली, रंग-गुलाब का उत्सव, एक-दूसरे पर रंग गुलाल डालने की क्रिया.

फाँग [phAMg]

सं.स्त्री.
एक भाजी जो बेलों में होती है.

फागुन [phAgun]

सं.पु.
फाल्गुन का महीना, विक्रम संवत् का 12 वाँ मास.

फागें [phAgen]

सं.स्त्री.
होली के अवसर पर गाया जाने वाला गीत.

फाजू [phAjU]

सं.स्त्री.
बुआ जी के लिए संबोधन.

फाँट [phAMT]

सं.पु.
परिवार की सम्पत्ति का बँटवारा.

फाटक [phATak]

सं.पु.
परकोटे आदि में लगा हुआ बड़ा दरवाजा.

फाँद [phAMd]

सं.पु.
चूड़ी आदि वृत्ताकार वस्तु का व्यास.

फाँदबौ [phAMdabau]

क्रि.स.
लाँघकर पार करना, दीवार पर चढ़कर लाँघना.