बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: ऊ

अक्षर 'ऊ' से शुरू होने वाली कहावतें

arrow_back वापस जाएं

ऊअते खों सब नमत, अयये खों कोऊ नई।

उगते सूर्य को सब सिर झुकाते हैं, डूबते को कोई नहीं।

ऊँग न देखे टूटी खाट। प्यास न देखे धोबी घाट।। प्रेम न देखे जात कुजात। भूक न देखे जूठो भात।।

क्षुधाय चाय ना सुधा, पिरीते चाय ना जाती। घूमे चाय ना खाट-पालंग, वाह्य चाय ना बाती। -बंगला

ऊँगतो बोले, जागतो न बोले।

जिससे सावधान होने की आशा नहीं वह तो सतर्क है, और जिसे सावधान रहना चाहिए वह चुप है।

ऊँगत् ती और बिछी पाई।

नींद आ रही थी और बिछी चारपाई मिल गयी। अर्थात मनचाही हुई।

ऊँची दुकान फीको पकवान।

दिखावट तो बहुत पर तत्त्व कुछ नहीं।

ऊजर गाँव अंड कौ प्या1, बेई माते, बेईव्या2।

(1.अनाज नापने का वर्तन जो पाव भर का होता है। 2.अनाज तौलने बाला।) अंधेर की जगह।

ऊँट की पीर गदा नई दागो1 जात।

(1.दागना = पीड़ा के स्थान को गरम धातु या मुद्रा से जलाना।) ऊँट को पीड़ा होने से गधा नहीं दागा जाता। जिसको कष्ट हो उसका ही इलाज किया जाता है।

ऊँट की पूँछ सें ऊँट बंदो।

एक के सहारे एक बंधा है। ऊँटों की पंक्ति चलने पर एक की पूंछ दूसरे की नकेल से बाँध दी जाती है जिससे वे इधर-उधर भागने न पायें।

ऊँट के गरे में बिलाई।

बेमेल जोड़। किसी काम में ऐसा अड़ंगा लगा देना जिससे वह हो न सके।

ऊँट के मों में जीरो।

बहुत खाने वाले को थोड़ी वस्तु देना।

ऊँट कैसी चम्मक।

ऊँट जैसी मजबूत पकड़। ऊँट के विषय में कहा जाता है कि एक बार किसी को पकड़ लेने पर वह उसे आसानी से नहीं छोड़ता।

ऊँट कौ चूमा ऊँटई लेत।

ऊँट का चूमा ऊँट ही लेता है। बड़ों का काम बड़ों से ही सटता है।

ऊँट चढ़ें कुत्ता ने काटो।

अर्थात् अनहोनी घटना घटित हुई। जब कोई मनुष्य अपने को विपत्ति से सब प्रकार से बचाता रहे, परन्तु फिर भी वह उसमें पड़ ही जाय तब कहते हैं।

ऊँट जब लौं पारबा तरें नई जात तब लों बो समजत के मो से बड़ो कोऊ नैयाँ।

अपने से अधिक बुद्धिमान के मिलने पर ही अपनी अल्पज्ञता का बोध होता है।

ऊँट पै चढ़कें सवैं मलक आउत।

ऊँट पर चढ़के सभी को मलकना आ जाता है। उच्च पद प्राप्त होने पर सभी को गर्व हो जाता है।

ऊँट पै सलीता लदै कुरिया1 पर पर जाय।

(1.कोरी, एक बुनकर जाति।) ऊँट पर तो माल का बोरा लद रहा है और कोरी चिल्लाता है कि हाय राम मरे ! परिश्रम तो किसी को करना पड़े और कष्ट किसी को हो।

ऊँट बये बये फिरें, गाड़र थाय लेय।

ऊँट तो बहे जा रहे हैं, गाड़र थाह लेती है। अनुचित साहस।

ऊँट बिलाई लै गई तौ हाँजू हाँजू करना।

ठकुर सुहाती कहना। बड़े आदमियों की हाँ में हाँ मिलाना।

ऊँट मरै तब पछायँ खाँ मों करै।

ऊँट जब मरता है तब पश्चिम को मुँह करता है। अंत समय सभी को अपना घर याव आता है। राजस्थान और अरब की मरुभूमि जो ऊँट का निवासस्थान है, पश्चिम की ही ओर है। इसीलिए ऊँट के संबंध में ऐसा कहते हैं। जब कोई आदमी ऊट-पटांग काम करता है तब भी प्रयुक्त।