अक्षर: ध
अक्षर 'ध' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंधजी की साँप बनाबो।
धजी का साँप बनाना। थोड़ी बात का बहुत विस्तार करना। झूठ बात बना कर खड़ी करता।
धड़ी धड़ी करबो।
किसी की मरम्मत करना। पीटना। बदनामी करना। घड़ी घड़ी करकें लूटौ अच्छी तरह लूटा।
धन के अँगारू मक्कर नाच।
धन के आगे मक्कर नाच। पैसे के लिए आदमी सौ तरह की चालबाजियाँ करता है।
धन के पंद्रा मकर पचीस। चिल्ला जाड़ो, दिन चालीस।।
15 दिसंबर से 13 या 14 जनवरी तक सूर्य धनुराशि में रहता है, उसके पश्चात मकर में। इस प्रकार धन के पन्द्रह और मकर के पच्चीस, इन चालीस दिनों जाड़ा जोर का पड़ता है। इसी को चिल्ला जाड़ा कहते हैं।
धन दै तनकों राखिये, तन दै रखिये लाज। / धनवंते काँटो लगो दौर परो संसार। / निर्धन गिरे करार सें कोऊ न पूछनहार।।
पा. धनवंते कांटो लगो सब जग परी पुकार। भोंदू गिरे करार सें कोऊ न पूछनहार।।
धनी न धोरी, पिरथीपुर1 के कोरी।
(1-झाँसी जिले में मऊरानीपुर तहसील का एक छोटा ग्राम, जहाँ किसी समय हाथ के बने कपड़े का अच्छा कारबार चलता था।) जब कोई साधारण आदमी अपने को बहुत महत्त्व दे तब कहते हैं।
धनी पालै, धनी मारै।
धनवान ही रक्षा करता है, और धनवान ही प्राणों का ग्राहक भी बनता है।
धन्नासेठ के नाती बनें फिरत।
थोड़ी पूँजी वाला जब अपने को बड़ा धनाढ्य समझे तब।
धन्नौं दे के बैठबो।
कोई काम कराने के लिए किसी के पास अड़ कर बैठना, और जब तक काम न हो तब तक अन्न-जल ग्रहण न करना।
धर जा, मर जा, बिसर जा।
दूसरे का माल हड़प जाने की इच्छा रखने वाले के लिए कहते हैं कि कोई उसके पास घरोहर रख जाय और मर जाय, तथा दूसरे लोग भी भूल जायें तो सब माल-मता उसका हो जाय।
धर तौ पटको, चढ़वे सब ठाँड़े। (अथवा चढ़वे हम ठाँड़े)।
किसी कठिन काम के मुख्य अंश को स्वयं न करके दूसरों को उसके लिए उकसाना।
धरबे को मियाँ, सुलगावे को मियाँ, पीवे कों आप, टिकावे कों मियाँ।।
हुक्के से मतलब है, कि भरने के लिए मियाँ, सुलगाने के लिए मियाँ, पीने को आप और फिर टिकाने को भी मियाँ। किसी से इस प्रकार का फालतू काम लिये जाने पर व्यंग्य।