अक्षर: ज
अक्षर 'ज' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंजौ घर बावनई बावन खों भओ।
यह घर बाबों ही बाबों को हुआ। फिजूलखर्ची करने पर प्रयुक्त।
जौ नई तौ और कर लओ, मोरो राम नें का कर लओ।
एक पति के मर जाने पर मैंने दूसरा कर लिया। राम ने मेरा क्या कर लिया ? स्वावलंबी व्यक्ति का कथन।
जौ बौ गुर नइयाँ जिये चींटा खा जायें। / जौलों गाड़ी ढँड़के तौलों ढँड़कायें जाओ।
जब तक काम चले चलाये जाओ।
जौन गाँव जानें नई बाकी गली का पूछने ?
जिस काम को करना नहीं उसकी चर्चा से क्या प्रयोजन ?
जौन दुक्ख छोड़ी भेलसी, तौनई तेली मिलौ परोसी।
दे. जौनई दुक्खन मुंड़ मुड़ाबो।
जौन नीम कौ कीरा, तौनई में मानत।
जिस आदमी को जैसे वातावरण में रहने का अभ्यास पड़ जाता है वह उसी में सुखी रहता है।
जौन बर देखें मोय ताप चढ़ै तौनईं बर व्याहन आय।
जिस बात से चिढ़ वही सामने आयी।
जौन रूख के जुआँ1 बनें तरेइँ हो काय खों कड़ने।
(1-जुआ, संस्कृत युग, गाड़ी के आगे लगी हुई वह लकड़ी जो बैलों के कंधे पर रहती है।) जिस वृक्ष की लकड़ी के जुआँ बने उसके नीचे से ही क्यों निकलना ? अर्थात जिस आदमी को हानि पहुंचायी है उसके समीप ही क्यों जाना ? उससे तो बच कर रहना अच्छा।
जौनई दुक्खन मूँड़ मुड़ाओ, तौनई दुक्ख आगे आँव।
जिस विपत्ति से बचना चाहा वही सामने आयी।
जौलों फूलै केतकी तौलों बिलम करील।
जब तक मनचाहा कार्य पूरा न हो तब तक कुछ-न-कुछ करते रहना चाहिए।
जौलों भूत गंगाजुए गये तौलों मरघटा जुत गये।
जब तक एक काम करने गये तब तक दूसरा चौपट हो गया।
जौलों लरका बारे, तौलों बिगनई1।
(1-बिगनों का आक्रमण। बिगना = भेड़िया।) जब तक लड़के छोटे हैं तभी तक भेड़ियों का डर है। पास में जब तक पैसा रहता है तब तक लूट- खसोट करने वाले भी मौजूद रहते हैं।
जौलों साँस तौलों आस।/ ज्यों केला के पात में, पात पात में पात। / त्यों ज्ञानी की वात में, बात बात में बात।। / ज्यों ज्यों कंचन त
विपत्ति में ही सज्जन पुरुषों के गुण प्रकट होते हैं।
ज्यों ज्यों भींजै कामरी, त्यों त्यों भारी होय।
मनुष्य संसार में जितना ही लिप्त होकर रहता है उतना ही पाप का बोझ बढ़ता जाता है।