अक्षर: अ
अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंअकुलाएँ खेती, सुसताएँ बंज।
खेती में तुर्त-फुर्त और व्यापार में धैर्य से काम लेने पर ही सफलता मिलती है।
अकेलो चना भार नई फोरत।
अकेला आदमी कुछ नहीं कर सकता। परस्पर सहयोग से सब काम होता है।
अकौआ सें हाती नई बँदत।
आक वृक्ष से हाथी नहीं बँधते। बड़ों का काम छोटों से नहीं निकलता।
अक्कल के पाँच टका लगत।
अक्ल के पाँच टके लगते हैं। अर्थात् बुद्धि पाने में पैसे खर्च होते हैं।
अक्कल के पाछे लट्ठ लये फिरतो।
अक्ल के पीछे लट्ठ लिये फिरते हैं। बुद्धि को तिलाञ्जलि दे रखी है।
अक्कल कोऊ की बाँटी नइयाँ।
भगवान् ने बुद्धि सब को दी है। वह किसी एक आदमी के हिस्से नहीं पड़ी अथवा बुद्धि किसी को बाँटी नहीं जा सकती।
अक्कल कौ अजीरन।
अक्ल का अजीर्ण। (1) समझबूझ कर काम न करना। (2) बहुत बुद्धिमानी प्रकट करना।
अक्कल बजार में मिलै तौ कोऊ मूरख काये खाँ रये।
अक्ल बाजार में मोल मिले तो कोई मूर्ख क्यों रहे ? अर्थात् अक्ल पैसे से नहीं खरीदी जा सकती।
अक्कल बड़ी कै भेंस।
बड़ा या बलवान होना ही सब कुछ नहीं, वरन् बुद्धि इन सबसे बड़ी वस्तु है। अक्ल बड़ी कि बहस।
अक्कल बिन पूत लठेंगर1 से। लरका बिन बऊ डेंगुर2 सी।
1. लकड़ी का लट्ठा, कुंदा। 2. भगोड़े बैल या ढोर के गले में लटका हुआ लकड़ी का मोटा डंडा, जिसका दूसरा सिरा जमीन पर पड़ा रहता है और ढोर के चलने के साथ घसिटता हुआ चलता है, उसके कारण ढोर भागने नहीं पाता; लंगर डेंगना; भार-स्वरूप वस्तु।)
अक्का कोदों नीम बन, अम्मा मौर धान। राय करौंदा जूनरी उपजै अमित प्रमान।।
जिस वर्ष अकौआ में खूब फूल आता है उस वर्ष कोदों, जिस वर्ष नीम खूब फूलता है उस वर्ष कपास, जिस वर्ष आम में खूब बौर आता है उस वर्ष धान, और जिस वर्ष रायकरौंदा खूब फलता है उस वर्ष ज्वार की फसल अच्छी होती है। कृषि संबंधी लोक-विश्वास।
अँखियन ओट पहाड़ ओट।
आँख से ओझल हुए तो मानों पहाड़ की ओट हो गये। कोई मनुष्य जब तक आँख के सामने रहता है तभी तक हमें उसका ध्यान रहता है।