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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: अ

अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें

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अगनौआ1 बतर2 पाऊँ तौ गेहूँ गाय बताऊँ।

(1. अश्विनी आदि 27 नक्षत्रों में से 8वाँ नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र। 2 वर्षा के दिनों में धूप निकलने पर खेती के काम के लिए मिलने वाला अवकाश) किसान कहता है कि भादों के महीने में यदि मुझे जोतने- बखरने का अवकाश मिल जाय तो मैं गेहूँ की बढ़िया फसल पैदा करके बताऊँ। कृ.।

अगहन दार कौ अदहन।

अगहन के महीने के दिन उसी तरह शीघ्र निकल जाते हैं जिस प्रकार दाल के पानी का उफान शीघ्र शान्त हो जाता है।

अगारी तुमाई, पछारी हमाई।

आगे का हिस्सा तुम्हारा, पीछे का हमारा। ऐसे स्वार्थी व्यक्ति के लिए जो किसी वस्तु का सबसे बड़ा भाग स्वयं लेना चाहे।

अगिया1 कहै पाँवर2 सें रोय। तोरे मोरे रहे का खेती होय।

(1. फसल को हानि पहुँचानेवाली एक प्रकार की घास। 2. एक छोटा जंगली पौधा, पंवार।) जिस खेत में अगिया और पँवार पैदा हो जाता है उसमें फसल अच्छी नहीं होती। कृ.।

अग्गम सोचे बानिया।

वैश्य हर काम सोच-विचार कर करता है।

अटकर की फातियाँ1 पड़बो।

(1. फातिहा, मुसलमानों के यहाँ मरे हुए लोगों के नाम पर पढ़ी जाने वाली प्रार्थना) अटकल की फातिहा पढ़ना। ऊटपटाँग हाँकना। बेअंदाज वात करना।

अटकर पंच्चूँ डेढ़ सौ।

बिना जाने समझे बात कहना। गप्प हाँकना।

अटन1 की टटन2 में, टटन की अटन में।

(1. टटन का अनुप्रासमूलक शब्द अथवा अटा अटारी 2. टटा का बहुवचन, बाँस की फंचियों या पतली टहनियों की बनी टट्टी।) इधर की वस्तु उधर रखना। वे सिर-पैर का काम करना।

अंड की मृदंग।

एरंड का मृदंग बनाना। बेतुका काम करना।

अड़की ऊँट लगौ, पे अड़की तौ चइये।

अड़की में ऊँट बिकता है, पर अड़की तो चाहिए।

अड़की की डुकरो टका मुड़ावनी।

लाभ तो थोड़ा और खर्च अधिक। चीज तो सस्ती, पर उसकी देखभाल या मरम्मत में असल से ज्यादा खर्च होना।

अड़की की हँड़िया ठोक बजा के लई जात।

अड़की की हाँड़ी भी ठोक बजा कर ली जाती है। सस्ती से सस्ती वस्तु भी देखभाल कर खरीदनी चाहिए। हर काम समझ-बूझ कर करना चाहिए।

अड़की की हॅड़िया फूटी सो फूटी, कुत्ता की जात तो पैंचानी।

हानि हुई तो हुई, पर किसी एक व्यक्ति के स्वभाव से परिचित तो हुए।

अड़की के नौनियाँ1 कों नौ दमरीं2 लगतीं।

(1. ग्रीष्म ऋतु में होने वाला एक हरा साग, कुलफा। 2. दमड़ी, पैसे का आठवाँ हिस्सा।) किसी चीज का खरीदना आसान होता है, पर उसे व्यवहार योग्य बनाने या उसके रख-रखाव में असल से अधिक खर्च हो जाता है।

अड़की कौ दूद खपरिया में खोवा।

जैसा थोड़ा काम वैसा उसका परिणाम। जैसा साधन वैसी सामग्री।

अड़ाई दिन के बादसा।

अढ़ाई दिन के बादशाह। संयोगवश थोड़े समय के लिए किसी ऊँचे पद पर पहुँच कर रोब दिखाने वाले के लिए व्यंग्य में प्रयुक्त। विवाह के अवसर पर दूल्हे को अढ़ाई दिन का बादशाह कहते हैं।

अत कौ फूलौ सोजनों1 डार पात सें जाय।

(1.एक वृक्ष विशेष, सहजन।) अति करने वाला नाश को प्राप्त होता है।

अत कौ भलौ न बोलनो अत की भली न चुप्प। अत कौ भलौ न बरसबो अत की भली न घुप्प।।

बोलना, चुप रहना, वर्षा और धूप ये चारों बातें आवश्यकता से अधिक अच्छी नहीं।