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बुंदेलखंड विश्वकोश

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अकती [akatI]

सं.स्त्री.
बुंदेलखण्ड का त्यौहार.

अकनियाँ [akaniyAM]

सं.स्त्री.
ज्वार की बाली (मुट्टा) जिनका दाना निकाला गया हो.

अकबकाई [akabakAI]

सं.स्त्री.
घबराहट.

अकबकाबौ [akabakAbau]

क्रि.अ.
घबराना.

अकरकरा [akarakarA]

सं.पु.
एक पौधा जिसकी जड़ दवा के काम आती है.

अकरात [akarAt]

सं.स्त्री.
थोड़ी-सी कड़वाहट.

अकराबौ [akarAbau]

क्रि.अ.
स्वाद में थोड़ी कडवाहट महसूस होना.

अकरियाँ [akariyAM]

सं.स्त्री.
दाने निकले हुए ज्वार के भुट्टे.

अकवार [akavAr]

सं.स्त्री.
दोनों भुजाओं का घेरा, छाती से लगाकर भेंटने की मुद्रा.

अकस [akas]

सं.स्त्री.
संकोच, किसी के प्रति मन में सालती हुई बात के कारण मन में मैल (क्षोभ).

अकारथ [akArath]

वि.
व्यर्थ, जिसका उपयोग न हो सका हो.

अकुरिया [akuriyA]

सं.स्त्री.
हल के नीचे का लकड़ी का टेढ़ा भाग जिसमें फाल लगा रहता है.

अकूत [akUt]

वि.
अनुमान से परे.

अकेला [akelA]

सं.पु.
अकेला घूमने वाला जंगली सुअर.

अकेली [akelI]

सं.स्त्री.
एकांकी.

अकेलौ [akelau]

वि.
साथविहीन.

अकोरबौ [akorabau]

क्रि.स.
थोड़ी-सी चिकनाई डालकर भूनना.

अक्क-बक्क [akk-bakk]

वि.
क्रि. घबराहट में तारतम्यहीन (बोलना).

अक्की-बक्की [akkI-bakkI]

सं.स्त्री.
मस्तिष्क का संतुलन.