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बुंदेलखंड विश्वकोश

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अचैबौ [acaibau]

क्रि.अ.
भोजन के पश्चात् हाथ-मुँह धोना.

अछयाउन [achayAun]

सं.पु.
निथारने के बाद निकला हुआ द्रव्य या बचा हुआ तलछट पदार्थ, दोनों अछयाउन कहलाते हैं.

अछाई [achAI]

सं.स्त्री.
साँप काटने पर झाड़ने के मंत्र.

अछुछर [achuchar]

सं.स्त्री.
अछत छोड़ने की क्रिया.

अछुतयाऊ [achutayAU]

सं.स्त्री.
उछूतौ ग्रहण करने वाली कन्या.

अछूतौ [achUtau]

सं.पु.
भोजन बनाते समय पहली रोटी जो खाने के लिए न छुई गई हो, जिसे किसी कुमारी ब्राह्मण कन्या, गरीब कन्या को दान में दिया जाता है.

अंजनी कुमार [anjanI kumAr]

सं.पु.
माता अंजनी के पुत्र हनुमान.

अजा [ajA]

सं.पु.
पिता का पिता, दादा.

अजाची [ajAcI]

सं.पु.
आचार्य, जो धार्मिक प्रवचन करता हो.

अजीरन [ajIran]

सं.पु.
अपच, कुपच, अधिक भोजन करने से पेट संबंधी विकार.

अटककें [ATakaken]

वि.
क्रि. विशेषकर, खास तौर से.

अटकबौ [ATakabau]

क्रि.अ.
रुकावट आना.

अटकर [ATakar]

सं.पु.
अनुमान, अन्दाज.

अटकरपच्चूँ [aTakarapaccUM]

वि.
क्रि. अनुमान से.

अटका [aTakA]

सं.पु.
दीपक रखने के लिए दीवार में लगा पत्थर, दीवार को कालिख से बचाने के लिए ऊपर मिट्टी का गोलाकार भाग बना होता है.

अटकाबौ [aTakAbau]

क्रि.स.
रुकावट डालना, उलझाना.

अटकी [aTakI]

सं.स्त्री.
उलझाने के अर्थ में.

अटर [aTar]

सं.स्त्री.
जटिलतायुक्त कार्य करने में अनुभव होने वाला मानसिक बोझ, टेढ़ी-मेढ़ी प्रक्रिया, शारीरिक और मानसिक मिला-जुला परिश्रम.

अटा [aTA]

सं.पु.
बहुमंजिला इमारत की ऊपरी छत, ऊपरी मंजिल.

अटेरन [aTeran]

सं.स्त्री.
धागा, डोरी आदि की लच्छी बनाने के लिए सूत लपेटने का एक विशेषाकृति की पटिया.