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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: अ

अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें

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आबे की एक, जावे की चार।

पैसे के आने का एक रास्ता होता है तो जाने के चार।

आम खानें कै पेड़े गिनने।

अपने काम से मतलब या इधर-उधर की बातों से ?

आम फलै नीचौ नवै।

बड़ा आदमी विनम्र होता है।

आय न साय चून चाल कें दै पओ।

घर में तो कुछ है नहीं, फिर भी कहते हैं कि चून चाल कर रोटी बनाओ।

आँये जाँयें काम चलत।

आने-जाने से ही काम चलता है। हम दूसरों के यहाँ जायेंगे, तो दूसरे भी हमारे यहाँ आयेंगे।

आये ते हर भजन कों औंटन लगे कपास।

आये थे किसी और काम को और करने लगे कुछ और।

आये न गये, घरईं रये।

सीधे-सादें अनुभवहीन व्यक्ति के लिए प्रयुक्त।

आरे बंडा1, अरो2 करियें, कई, में तौ पूँछई उठायें।

(1.पूँछ-कटा बैल। 2.उपद्रव।) एक बैल ने दूसरे से कहा- आ रे बंडा ! उपद्रव करें, तो उत्तर दिया, मैं तो पूंछ उठाये पहिले से तैयार हूँ !

आलसी निगड्या, असगुन की बाट हेरें।

आलसी चलने वाला अशकुन की प्रतीक्षा करता है (कि मुझे चलना न पड़े) काम न करने के लिए बहाना ढूंढ़ने पर।

आला गाऊँ के परमाला1।

(1.परमाल का यश; परमाल रासौ, जिसमें महोबे के चंदेलराज परमाल या परदिदेव की कथा वर्णित है।) मैं क्या-क्या कहूँ ?

आंला1 कौ का गाइये, सुघर लबार2 चाइये।

(1.बुन्देली भाषा का प्रसिद्ध वीर-काव्य आल्हा। 2.झूठा, लंब-तड़ेंगी हाँकने वाला) आल्हा का क्या गाना, उसके लिए तो बस कोई सुघड़ गप्प हाँकने वाला चाहिए। अभिप्राय यह कि चतुराई से काम लेने पर झूठ बात को भी सत्य बनाया जा सकता है।

आव बहिन कौ भाई, भीतर जाय दर्राई।

भाई जब अपनी बहिन की ससुराल जाता है तो वे रोक-टोक सीघा बहिन के पास चला जाता है, किसी से कुछ पूँछता-ताँछता नहीं।

आस बिरानी जे करें होतन ही मर जायें।

दूसरों की आशा करने की अपेक्षा तो जन्मते ही मर जाना अच्छा।

आसई आसा में प्रान गये।

मन की इच्छा पूरी नहीं हुई। आशा-आशा में ही प्राण निकल गये।

आसरे से सासरो लगो।

लाभ की आशा से ही ससुराल का महत्व है।

आसा की बेल पहाड़े चढ़त।

आशा की बेल पहाड़ पर चढ़ती है। आशा में बड़ी शक्ति है।

आसा कौ बाप, निरासा की माँ, होते की बहिन, अनहोते कौ मीत।

सुख में पिता, दुख में माता, सम्पत्ति में बहिन और विपत्ति में मित्र काम आता है।

आसा कौ मरै, निरासा कौ जिये।

आशा में रहने से आदमी मरता है, परन्तु पहिले से निराश हो जाये, अथवा किसी से कोई आशा न रखे, तो सुखी रहता है।

आसा से आसमान टँगो।

आशा के बल पर ही आसमान टँगा है।