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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: अ

अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें

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आँखन के आँदरे, नाव नैनसुख।

नाम तो अच्छा पर गुण उसके विपरीत।

आँखन कौ काजर रन-वन हो गओ।

रोते-रोते आँखों का काजल धुल गया। अर्थात् बहुत विकल।

आँखन कौ काजर।

अत्यधिक प्रिय वस्तु।

आँखन देखत माछी नई खाई जात।

जान-बूझ कर बुरा काम नहीं किया जाता।

आँखन देखी मानें, कै कानन सुनी।

आँखों देखी बात सच मानें या कानों सुनी ?

आँखन देखो चेतनो, मों देखो ब्योहार।

दुनिया में आँख के सामने आये का स्नेह, और मुँह देखा व्यवहार होता है, अर्थात् सच्चा प्रेम कम देखने में आता है।

आँग की माँछी नई उड़ा पाउत।

शरीर की मक्खियाँ नहीं उड़ा पाता ऐसा काहिल है। निकम्मे और आलसी व्यक्ति के लिए प्रयुक्त।

आग जानें, लुहार जानें, धौंकनहारे की बलाय जानें।

अर्थात् कुछ भी हो, हमें किसी बात से कोई मतलब नहीं।

आग में गओ हाते नई आऊत।

आग में गयी वस्तु हाथ नहीं आती। नष्ट हुई वस्तु फिर नहीं मिलती।

आग लगा पानी खों दौरें।

झगड़ा करा कर फिर मेल का उद्योग करना।

आग लगे पै कुआ खोदबो।

काम बिगड़ जाने पर यत्न के लिए दौड़ना। पहिले से प्रबंध न करना।

आग लगे, मँड़वा धुँधुआय; दूला-दुलैया सरगे जाय।

दूसरे के नफे-नुकसान की परवाह न करना। लड़ाई-झगड़े से तटस्थ रहना।

आगली सोचें पाछली होत।

सोचते आगे का है, पर काम और पिछड़ता है। होनहार की बातें।

आगी रोज लै गई, कंडा कभऊँ न दे गई।

स्वार्थी स्त्री के लिए कहते हैं।