अक्षर: अ
अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंआँखन कौ काजर रन-वन हो गओ।
रोते-रोते आँखों का काजल धुल गया। अर्थात् बहुत विकल।
आँखन देखो चेतनो, मों देखो ब्योहार।
दुनिया में आँख के सामने आये का स्नेह, और मुँह देखा व्यवहार होता है, अर्थात् सच्चा प्रेम कम देखने में आता है।
आँग की माँछी नई उड़ा पाउत।
शरीर की मक्खियाँ नहीं उड़ा पाता ऐसा काहिल है। निकम्मे और आलसी व्यक्ति के लिए प्रयुक्त।
आग जानें, लुहार जानें, धौंकनहारे की बलाय जानें।
अर्थात् कुछ भी हो, हमें किसी बात से कोई मतलब नहीं।
आग में गओ हाते नई आऊत।
आग में गयी वस्तु हाथ नहीं आती। नष्ट हुई वस्तु फिर नहीं मिलती।
आग लगे तोरी पोथिन में। जिउ धरौ मोरो रोटिन में।
भूख के सामने पढ़ना नहीं सूझता।
आग लगे पै कुआ खोदबो।
काम बिगड़ जाने पर यत्न के लिए दौड़ना। पहिले से प्रबंध न करना।
आग लगे, मँड़वा धुँधुआय; दूला-दुलैया सरगे जाय।
दूसरे के नफे-नुकसान की परवाह न करना। लड़ाई-झगड़े से तटस्थ रहना।
आगली सोचें पाछली होत।
सोचते आगे का है, पर काम और पिछड़ता है। होनहार की बातें।