अक्षर: अ
अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंआगी होती तौ का पाहुनो मूँछें लैकें चलो जातो !
यदि हम समर्थ होते तो कुछ कर न दिखाते !
आँगे लगीं माँछीं।
शरीर से लगी मक्खियाँ। घर के बूढ़े-पुरानों के अंग लगे बच्चों के लिए प्रयुक्त।
आटे में नोन समा जात, पै नोन में आटो नई समात।
आटे में नमक समा जाता है, पर नमक में आटा नहीं। अर्थात् झूठ अधिक नहीं बोलना चाहिए।
आठ गौन1 राज-रास2, नौ गौन अकरियाँ3।
(1. पाँच मन के लगभग की अनाज की एक माप। 2. कटी हुई फसल से प्राप्त गल्ले का मुख्य ढेर। 3. भूसे के मोटे डंठल जिनमें अनाज के दाने मिले होते हैं।)
आठऊ गाँठ कुम्मैत1।
(1.घोड़े का एक रंग जो गहरी स्याही लिये लाल होता है, उन्नावी रंग। घोड़े का यह रंग सब रंगों में श्रेष्ठ माना जाता है। आठों गाँठ कुम्मैत उस घोड़े को कहते हैं जो सिर से पैर तक एक हो, कुम्मैत रंग का हो। अत्यन्त चतुर और चालाक व्यक्ति के लिए प्रयुक्त।)
आड़आ नातो, पड़आ गोत।
जैसा नाता वैसाही गोत। बे पते-ठिकाने के ऐसे व्यक्ति के लिए जो जबर्दस्ती अपना रिश्ता निकालता फिरे।
आड़ी को पाँसी।
चौपर के खेल में गोट मारने के लिए 3, 4, 9, 10, 15 आदि के दाव मुश्किल से पड़ते हैं, और इन संख्याओं वाले पाँसे अड़ी के पाँसे कहलाते हैं। उसी से कहावत बनी। दो आदमियों के बीच बेढब तरीके से कोई बात अटक जाने पर प्रयुक्त।
आड़ी से ठाँड़ी सींक नइँ करत।
आड़ी से खड़ी सींक नहीं करता। अर्थात् बड़ा आलसी है।
आँतरे रोजे कसरत करे। राम न मारें आपुई मरै।
कसरत नियम से करना चाहिए, अन्यथा उससे हानि होती है।
आतुर खेती, आतुर भोजन, आतुर करिये बेटी ब्याह।
खेती के काम में शीघ्रता, भोजन में शीघ्रता और बेटी के विवाह में भी शीघ्रता से काम लेना चाहिए।
आदमियन में नौआ, और पंछियन में कौआ।
मनुष्यों में नाई और पक्षियों में कौआ ये बड़े चतुर होते हैं।
आदमी जानिये बसें, सोनों जानिये कसें।
आदमी की परख निकट सम्पर्क में रहने और सोने की परख कसौटी पर कसने से होती है।